पुलिस हिरासत में मौतों का पूरा डेटा दें: झारखंड हाई कोर्ट ने गृह सचिव को दिया निर्देश
झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को पुलिस हिरासत या पुलिस ट्रांजिट के दौरान होने वाली मौतों का विस्तृत ब्योरा प्रस्तुत करने का कड़ा निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश राजेश शंकर की खंडपीठ ने गृह विभाग के प्रधान सचिव द्वारा पेश किए गए शपथ पत्र पर गहरी असहमति जताई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रस्तुत शपथ पत्र में केवल जेल या न्यायिक हिरासत में हुई मौतों का ही डेटा शामिल किया गया है, जबकि पिछले आदेश में सभी प्रकार की हिरासत में होने वाली मौतों का संपूर्ण विवरण मांगा गया था।
अदालत ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि सरकार द्वारा पेश किए गए आंकड़े अधूरी जानकारी प्रदान करते हैं। इस गंभीर मामले को देखते हुए, अदालत ने गृह विभाग के प्रधान सचिव को व्यक्तिगत रूप से तीन सप्ताह के भीतर एक नया और विस्तृत शपथ पत्र दाखिल करने का आदेश दिया है। इस शपथ पत्र में पुलिस हिरासत और पुलिस ट्रांजिट में हुई मौतों के सभी मामलों का स्पष्ट और पूर्ण ब्योरा शामिल होना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 18 दिसंबर को निर्धारित की गई है।
यह जनहित याचिका मुमताज अंसारी एवं अन्य द्वारा दायर की गई थी। अदालत ने 25 सितंबर को पुलिस हिरासत में हुई मौतों का संपूर्ण डेटा मांगा था, लेकिन सरकार द्वारा प्रस्तुत जवाब अपर्याप्त पाया गया, जिसके कारण यह नया निर्देश जारी किया गया है।
सूत्रों के अनुसार, सरकार द्वारा दाखिल किए गए पिछले शपथ पत्र में वर्ष 2018 से अब तक जेल या न्यायिक हिरासत, पुलिस हिरासत और पुलिस थाना में हुई कुल 427 मौतों का उल्लेख किया गया था। इसमें यह भी कहा गया था कि प्रत्येक मौत के बाद इसकी सूचना तत्काल मजिस्ट्रेट को दे दी गई थी।
वहीं, याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को अवगत कराया गया कि हिरासत में मौत होने की स्थिति में कानून के अनुसार न्यायिक जांच मजिस्ट्रेट के स्तर पर होनी चाहिए। हालांकि, सरकार की ओर से अक्सर एग्जिक्यूटिव रैंक के अधिकारियों द्वारा जांच कराई जाती है, जो न्यायिक जांच के मानकों को पूरा नहीं करती। इस पर अदालत ने सरकार से यह भी पूछा था कि क्या मजिस्ट्रेट द्वारा जेल या न्यायिक हिरासत में हुई मौतों के मामलों में कोई जांच की गई थी, जिसका रिकॉर्ड स्पष्ट नहीं था। अदालत इस बात पर जोर दे रही है कि हिरासत में होने वाली मौतों की जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो।
