प्रलोभन से ईसाई बने 25 सिख परिवारों की घर वापसी
पीलीभीत में एक बार फिर सिख समुदाय की मजबूत वापसी देखने को मिली है। नेपाल सीमा से सटे इलाकों में ईसाई मिशनरियों द्वारा कथित तौर पर प्रलोभन देकर मतांतरण कराए गए 25 सिख परिवारों ने सोमवार को अपनी मूल धर्म में घर वापसी कर ली है। यह परिवार नेपाल सीमावर्ती गुरुद्वारा सिंह सभा, टाटरगंज में पहुंचे, जहां ऑल इंडिया सिख पंजाबी वेलफेयर काउंसिल ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। घर वापसी की प्रक्रिया के तहत, इन सभी परिवारों ने बाकायदा शपथपत्र भी दिए हैं, जिन्हें जिला प्रशासन को भेजा गया है।
सूत्रों के अनुसार, पिछले लगभग 10 वर्षों से ईसाई मिशनरी आर्थिक रूप से कमजोर सिख परिवारों को निशाना बना रही थीं। उन पर आरोप है कि धन और कृषि भूमि जैसे प्रलोभनों का लालच देकर उनका मतांतरण कराया जा रहा था। पिछले साल एक महिला द्वारा किए गए विरोध के बाद यह मामला तब और गरमा गया था, जब अलग-अलग स्थानों पर पादरियों सहित कई लोगों के खिलाफ चार मुकदमे दर्ज किए गए थे।
सिख संगठनों ने इस अवैध मतांतरण के खिलाफ एक बड़े अभियान की शुरुआत की है। उनका दावा है कि सीमावर्ती गांवों में दो हजार से अधिक सिखों का जबरन या प्रलोभन देकर मतांतरण कराया गया है। इस अभियान के तहत, पिछले सात महीनों में अब तक लगभग 400 लोग अपनी मूल धर्म में लौट चुके हैं।
ऑल इंडिया सिख पंजाबी वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष हरपाल सिंह जग्गी ने कहा कि प्रदेश सरकार अवैध मतांतरण के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है, जिससे ऐसे कृत्यों पर अंकुश लगा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी समुदाय के लोगों को बहकाकर या डराकर उनका धर्म परिवर्तन कराना गलत है और सरकार की सख्ती के कारण ऐसे तत्वों पर लगाम कसी जा रही है। इस घर वापसी को सिख समुदाय के लिए एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है, जो अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को बनाए रखने के लिए प्रयासरत है।
