प्रेम का बंधन सबसे अनूठा: रमेश भाई ओझा ने भागवत कथा में किया वर्णन
प्रेम का बंधन सबसे अनूठा और स्वीकार्य बंधन है, न कि जबरन थोपा गया। स्वयं ईश्वर भी इस बंधन को स्वीकार करते हैं, जैसा कि यशोदा मैया द्वारा बांधे जाने पर भगवान कृष्ण के बंध जाने की कथा से प्रतीत होता है। यह प्रेम का बंधन परम आनंद का स्रोत है। ये विचार प्रख्यात श्रीमद्भागवत प्रवक्ता रमेश भाई ओझा ने गुरुवार को माताजी गोशाला में कथा सुनाते हुए व्यक्त किए।
भाईजी ने आगे बताया कि श्रीराधाजी का नाम भगवान ठाकुरजी को अत्यंत प्रिय है, यही कारण है कि राधा नाम सुनने के लोभ में कन्हैया उनके पीछे चले आते हैं। सामान्य दृष्टिकोण से देखने पर लोग राधाजी को केवल एक गोपी मानते हैं, जो गोपनशील हैं और छिपी हुई हैं। लेकिन सत्य यह है कि यदि श्रीराधा न होतीं, तो भागवत की रचना ही संभव न होती। राधाजी, महर्षि शुकदेवजी की दीक्षा गुरु भी हैं। उनकी कृपा की एक दृष्टि मात्र से जीवन धन्य हो सकता है।
कथा के दौरान, भाईजी ने सगुण साकार ब्रह्म, अवतारवाद जैसी दार्शनिक अवधारणाओं को भी समझाया और शुकदेवजी के प्रसंग का भी वर्णन किया। उन्होंने रामराज्य के लक्षणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आदर्श रामराज्य में काल, कर्म, स्वभाव और गुण के प्रभाव से कोई भी प्राणी दुखी नहीं होता था। रामराज्य की राजनीति केवल साम और दाम के सिद्धांतों पर आधारित थी, न कि दंड और भेद जैसे उपायों की आवश्यकता पड़ती थी।
इस अवसर पर संध्या काल में सीताराम के विवाहोत्सव का भी भव्य आयोजन किया गया। बक्सर वाले श्री नारायण भक्तमाली मामाजी की बेटी सिया दीदी और उनके सहयोगियों द्वारा श्रीराम जन्मलीला का मनमोहक मंचन प्रस्तुत किया गया। इस धार्मिक कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के संत रामबालक दास महाराज, रमाकांत गोस्वामी, हरिमोहन गोस्वामी, रामकटोर पांडेय, नृसिंह बाबा, मान मंदिर सेवा संस्थान के अध्यक्ष रामजीलाल शास्त्री, कार्यकारी अधिकारी राधाकांत शास्त्री, सचिव सुनील सिंह ब्रजदास, माताजी गोशाला के संयोजक ब्रजशरण दास बाबा, पद्मेश गुप्ता, अनुराधा गुप्ता सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
