प्रदूषण और ठंड का दोहरा वार: सांस के रोगी बढ़े, वायरल बुखार भी बेहाल
बदलता मौसम और वायुमंडल में बढ़ता प्रदूषण लोगों के स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रहा है। कड़ाके की ठंड के साथ-साथ प्रदूषण के खतरनाक स्तर ने श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारियों को बढ़ावा दिया है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, कई लोग सांस लेने में तकलीफ की शिकायत कर रहे हैं। चिकित्सकों ने ऐसे मरीजों को विशेष सावधानी बरतने और गुनगुने पानी का सेवन करने की सलाह दी है।
शनिवार को जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़ देखी गई। कुल 988 मरीजों ने अपने पर्चे बनवाकर उपचार कराया। इनमें से 120 बड़े और 55 छोटे बच्चों में वायरल बुखार की पुष्टि हुई। इसके अलावा, 93 लोगों को सांस लेने में गंभीर तकलीफ थी, जिसके लिए चिकित्सकों ने उन्हें दवाएं देते हुए ठंड से बचाव और गुनगुने पानी के सेवन के निर्देश दिए। वहीं, 32 लोगों को डायरिया की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कर उपचार शुरू किया गया। अधिकांश अन्य मरीज सर्दी, खांसी और जुकाम से पीड़ित पाए गए, जिन्हें चिकित्सकों ने एहतियात बरतने की सलाह दी।
जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. संजीव सक्सेना ने बताया कि बदलते मौसम में नागरिकों को अपनी सेहत के प्रति अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। उन्होंने विशेष रूप से प्रदूषण वाले क्षेत्रों में जाते समय चश्मा पहनने और ऐसे स्थानों पर अनावश्यक रूप से जाने से बचने की सलाह दी। प्रदूषण के कारण आंखों में जलन और सांस संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि वायु प्रदूषण फेफड़ों की कार्यक्षमता को कम करता है और श्वसन संबंधी बीमारियों के जोखिम को बढ़ाता है। ठंड के मौसम में, जब हवा की गति धीमी हो जाती है, तो प्रदूषक कण जमीन के करीब जमा हो जाते हैं, जिससे प्रदूषण का स्तर और बढ़ जाता है। इन परिस्थितियों में, वायरल संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है, क्योंकि कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग आसानी से इसकी चपेट में आ जाते हैं। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें, मास्क का प्रयोग करें और अपने खान-पान का विशेष ध्यान रखें।
