0

पराली जलाने की घटनाओं में कमी, प्रशासन की सख्ती का दिखा असर

By Nov 20, 2025

महाराजगंज जिले में पराली जलाने की घटनाओं पर प्रशासन की सख्ती का असर धीरे-धीरे दिखने लगा है। मंगलवार को जहां 72 ऐसे मामले दर्ज किए गए थे, वहीं बुधवार को यह संख्या घटकर मात्र 17 रह गई। ताजा आंकड़ों के अनुसार, अब तक जिले में कुल 374 घटनाएं सामने आ चुकी हैं। उप कृषि निदेशक ने बताया कि पराली जलाने वाले किसानों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है और टीमें खेतों की निगरानी कर रही हैं।

मंगलवार को बड़ी संख्या में दर्ज हुई घटनाओं के बाद प्रशासनिक अमला हरकत में आ गया था। लेखपालों, उप जिलाधिकारी (एसडीएम), थानाध्यक्षों और कृषि विभाग के अधिकारियों को जारी नोटिसों के बाद पुलिस, राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीमें बुधवार को दिनभर अलर्ट रहीं। इसके परिणामस्वरूप पराली जलाने के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई।

इसी क्रम में, झुलनीपुर के बढ़ैपुरवा गांव में पराली जलाने की सूचना मिलते ही शीतलापुर चौकी प्रभारी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों की मदद से आग पर काबू पाया। इस दौरान किसानों को पराली जलाने के गंभीर दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से समझाया गया। उन्हें बताया गया कि यह स्वास्थ्य, पर्यावरण और मिट्टी की उर्वरता के लिए अत्यंत हानिकारक है।

नौतनवा क्षेत्र में भी डंठल जलाने की घटनाएं प्रकाश में आईं, जहां कुछ ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्रवाई को धीमा बताया। हालांकि, एसडीएम ने सभी शिकायतों पर तत्काल और सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके अलावा, भैया फरेंदा में एसडीएम और क्षेत्राधिकारी (सीओ) ने स्वयं जलती पराली को बुझाने का कार्य किया और किसानों को जागरूक किया।

अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि पराली जलाना एक कानूनी अपराध है और यह स्वास्थ्य के लिए उतना ही खतरनाक है जितना कि एक साथ 100 सिगरेट पीना। प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और जागरूकता अभियान को और अधिक मजबूत किया जाएगा ताकि घटनाओं में और कमी लाई जा सके।

About

Journalist covering latest updates.

साझा करें