पराली दहन में मथुरा की रैंकिंग सुधरी, प्रदेश में छठे स्थान पर
मथुरा जिले में पराली जलाने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है, जिसके चलते यह जिला अब प्रदेश की रैंकिंग में छठे स्थान पर आ गया है। कुछ समय पहले तक, मथुरा पराली दहन की घटनाओं के मामले में प्रदेश में पहले स्थान पर था। यह बदलाव जिला प्रशासन द्वारा उठाए गए कड़े कदमों और जुर्माना वसूली में बरती गई सख्ती का परिणाम है।
सूत्रों के अनुसार, पहले जब जुर्माना वसूली की रफ्तार 40 प्रतिशत से भी नीचे थी, तब पराली जलाने की घटनाएं बढ़ रही थीं। इस लापरवाही को ‘हिन्दुस्तान’ के ‘मथुरा बोले’ अभियान के तहत उजागर किया गया था, जिसके बाद जिला प्रशासन ने हरकत में आते हुए रोकथाम के लिए प्रभावी उपाय लागू किए।
नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, मथुरा में पराली दहन की 113 घटनाएं दर्ज की गई हैं। वहीं, प्रदेश में महाराजगंज 190 घटनाओं के साथ पहले स्थान पर, जालौन 177 घटनाओं के साथ दूसरे, हरदोई 143 के साथ तीसरे, फतेहपुर 130 के साथ चौथे और झांसी 114 घटनाओं के साथ पांचवें स्थान पर है।
जिला प्रशासन ने पराली जलाने वाले 116 किसानों पर कुल 4.275 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। इस जुर्माने का 99 प्रतिशत, यानी 4.225 लाख रुपये, सफलतापूर्वक वसूल लिया गया है। शेष जुर्माने की वसूली भी जल्द पूरी कर ली जाएगी। कृषि विभाग के उप निदेशक बसंत कुमार दुबे ने बताया कि पराली दहन में जनपद अब प्रदेश में छठे स्थान पर आ गया है और जुर्माने की वसूली भी लगभग पूरी हो चुकी है। इससे निश्चित रूप से पराली दहन की घटनाओं में कमी आई है।
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