पोप लिओ ने इस्तांबुल की नीली मस्जिद में झुकाकर दिखाया धार्मिक सद्भाव का जज्बा
पोप लिओ ने हाल ही में इस्तांबुल की प्रसिद्ध नीली मस्जिद का दौरा किया, जो दुनिया भर में धार्मिक सद्भाव और आपसी समझ को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मस्जिद में प्रवेश करने से पूर्व, पोप लिओ ने विनम्रतापूर्वक झुककर और अपने जूते उतारकर इस पवित्र स्थल के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त किया। यह कृत्य विभिन्न धर्मों के बीच शांति और सहिष्णुता के संदेश को बल देता है।
पोप लिओ अपनी पहली विदेश यात्रा के हिस्से के तौर पर तुर्किये पहुंचे हैं। इस यात्रा के दौरान, उन्होंने नीली मस्जिद में लगभग 20 मिनट का समय बिताया। मस्जिद के इमाम और इस्तांबुल के मुफ्ती ने उन्हें मस्जिद के परिसर का भ्रमण कराया और इसके ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व से अवगत कराया। नीली मस्जिद, जिसका आधिकारिक नाम सुल्तान अहमद मस्जिद है, 17वीं शताब्दी की एक उत्कृष्ट वास्तुकला का नमूना है। इसका नामकरण इसके अंदरूनी हिस्सों में लगी हजारों नीली सिरेमिक टाइलों के कारण हुआ है, जो इसे एक अनूठी पहचान प्रदान करती हैं।
यह ऐतिहासिक मस्जिद प्रसिद्ध हागिया सोफिया के निकट स्थित है। हालांकि, पोप लिओ ने इस बार हागिया सोफिया का दौरा नहीं किया। हागिया सोफिया, जो कभी ईसाई धर्म का एक प्रमुख केंद्र था और बाद में मस्जिद बना, फिर एक संग्रहालय और हाल ही में पुनः मस्जिद में परिवर्तित कर दिया गया, एक जटिल ऐतिहासिक और राजनीतिक प्रतीक है। उल्लेखनीय है कि 2020 में हागिया सोफिया को फिर से मस्जिद बनाए जाने पर पोप फ्रांसिस ने निराशा व्यक्त की थी।
अपने इस्तांबुल प्रवास के दौरान, पोप लिओ ने शुक्रवार को निकिया की पहली काउंसिल की 1,700वीं वर्षगांठ के समारोह में भी भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने धर्म के नाम पर की जाने वाली हिंसा की कड़ी निंदा की और ईसाई समुदाय से एकता बनाए रखने का आग्रह किया। निकिया की पहली काउंसिल, जो वर्ष 325 में आयोजित हुई थी, बिशपों की एक महत्वपूर्ण सभा थी जिसने ईसाई धर्म के प्रारंभिक सिद्धांतों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, उस समय जब पूर्वी और पश्चिमी चर्च एक थे। पोप लिओ का यह दौरा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति और धार्मिक सहिष्णुता के संदेश को फैलाने में एक महत्वपूर्ण योगदान है।
