पंजाब में हिंदू नेताओं की टारगेट किलिंग: अशांति फैलाने की रची जा रही साजिश
पंजाब में पिछले सात वर्षों में हिंदू नेताओं को निशाना बनाकर की गई हत्याओं की श्रृंखला ने राज्य की शांति और सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, पिछले सात सालों में करीब दस हिंदू नेताओं की लक्षित हत्याएं हुई हैं, जिससे खुफिया एजेंसियों में चिंता की लहर दौड़ गई है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन घटनाओं के पीछे पंजाब को अस्थिर करने और सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने का एक गहरा षड्यंत्र रचा जा रहा है।
घटनाओं के पैटर्न से यह स्पष्ट होता है कि हत्यारे पहले रेकी करते हैं और फिर सरेआम, नजदीक से गोली मारकर बेखौफ फरार हो जाते हैं। हाल ही में फिरोजपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यकर्ता नवीन अरोड़ा की हत्या इसी पैटर्न का एक और उदाहरण थी, जहां हमलावर पैदल आए और वारदात को अंजाम देकर भाग निकले। सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि इन हमलों का मुख्य उद्देश्य पंजाब में भय का माहौल बनाना और कानून व्यवस्था को चुनौती देना है।
कई हाई-प्रोफाइल मामलों में आतंकवादी समूहों और विदेशी ताकतों के हाथ होने के संकेत मिले हैं। यही कारण है कि अधिकांश मामलों में मुख्य अपराधी अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं और वर्षों बाद भी मामले विचाराधीन हैं, जिससे पीड़ितों के परिवारों को न्याय का इंतजार है।
2016 में जालंधर में आरएसएस नेता ब्रिगेडियर जगदीश गगनेजा की हत्या को इस पैटर्न की शुरुआत के रूप में देखा जाता है। इसके बाद, लुधियाना में आरएसएस नेता रविंदर गोसाईं की हत्या जैसी घटनाएं हुईं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा की गई जांच में इन हत्याकांडों में गैंगस्टर-आतंकी गठजोड़ की थ्योरी को बल मिला, जिसमें विदेशों से मिले निर्देशों पर पंजाब के गैंगस्टरों द्वारा हमलों को अंजाम दिया गया।
2022 में अमृतसर में हिंदू नेता सुधीर सूरी की हत्या तो एक प्रदर्शन के दौरान, कैमरों के सामने और पुलिस की मौजूदगी में हुई, जिसने पूरे समुदाय को झकझोर दिया और हिंदू संगठनों में भारी रोष पैदा किया। इसके बाद 2023 और 2024 में भी व्यापारिक संगठनों और मंदिर समितियों से जुड़े हिंदू नेताओं को निशाना बनाया गया, जैसे जालंधर में दिवेश गुप्ता, लुधियाना में संदीप अरोड़ा, फाजिल्का में रवि मेहता, पटियाला में राजेश गुप्ता और पठानकोट में संजय गुप्ता पर जानलेवा हमले। इन घटनाओं ने राज्य में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा किया है।
जांचों में सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) जैसे अलगाववादी संगठनों और कनाडा स्थित गैंगस्टर-आतंकी मॉड्यूल का नाम सामने आया है। पुलिस का मानना है कि हथियारों की आपूर्ति और हमलों के लिए फंडिंग में पाकिस्तान और विदेशों में बैठे हैंडलरों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इन बढ़ते खतरों के मद्देनजर, हिंदू संगठनों ने सरकार से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की है, ताकि पंजाब की शांति और सांप्रदायिक सौहार्द को बनाए रखा जा सके।
