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पंजाब बिजली क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर, ‘रोशन पंजाब’ का सपना साकार

By Nov 18, 2025

चंडीगढ़: पंजाब सरकार, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के कुशल नेतृत्व में, राज्य के बिजली क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन ला रही है, जिससे पंजाब ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है। सरकार ने पावरकॉम पर चढ़ा 2,000 करोड़ रुपये का भारी कर्ज चुकाकर एक बड़ी वित्तीय बाधा को पार कर लिया है, जिससे राज्य की वित्तीय स्थिति मजबूत हुई है।

जुलाई 2022 में शुरू की गई महत्वाकांक्षी 600 यूनिट मुफ्त बिजली योजना ने प्रदेश के 90% से अधिक घरों के बिजली बिल को शून्य कर दिया है। इस जन-हितैषी पहल ने न केवल आम नागरिकों को बड़ी आर्थिक राहत प्रदान की है, बल्कि उद्योगों और किसानों के लिए भी 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की है। इसके परिणामस्वरूप, पंजाब अब देश में बिजली की सबसे कम दरों की पेशकश करने वाले राज्यों में चौथे स्थान पर आ गया है।

ऊर्जा आपूर्ति को सुदृढ़ करने की दिशा में एक निर्णायक कदम उठाते हुए, सरकार ने पछवाड़ा कोल माइंस को पुनर्जीवित किया है, जिससे कोयले की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हुई है। ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को और बढ़ावा देने के लिए, पंजाब ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए गोइंदवाल साहिब स्थित जीवीके कंपनी के निजी थर्मल प्लांट को 1,080 करोड़ रुपये में अधिग्रहित किया है। इस संयंत्र का नाम अब श्री गुरु अमरदास जी थर्मल प्लांट रखा गया है, जो ऊर्जा आत्मनिर्भरता के साथ-साथ सांस्कृतिक गौरव का भी प्रतीक है।

‘रोशन पंजाब परियोजना’ के तहत, राज्य को अगले वर्ष तक 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए बिजली क्षेत्र में 5,000 करोड़ रुपये का महत्वपूर्ण निवेश किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, 13 नगर निगमों में बिजली के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है, जिसमें पुरानी और असुरक्षित नंगी व झूलती तारों को बदला जा रहा है, खुले मीटर बॉक्स को सील किया जा रहा है और सुरक्षा मानकों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इस अवसर पर कहा कि पंजाब में पहली बार किसी सरकार ने निजी संपत्ति का अधिग्रहण किया है, जबकि पिछली सरकारें सरकारी संपत्तियों को बेचने में लगी रहती थीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘रोशन पंजाब’ अब केवल एक योजना नहीं, बल्कि एक ऊर्जा क्रांति का प्रतीक बन गया है, जहाँ बिजली केवल एक सुविधा न होकर, आत्मनिर्भरता और सम्मान का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।

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