पाकिस्तानी TikToker Fatima Jatoi विवाद: 6 मिनट 39 सेकंड के वीडियो का सच क्या है?
सोशल मीडिया की दुनिया में नाम और बदनामी अक्सर साथ-साथ चलती है। ऐसा ही कुछ पाकिस्तान की प्रसिद्ध टिकटॉकर फातिमा जटोई के साथ हुआ। साल 2026 की शुरुआत में, उनके नाम से एक कथित वीडियो इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गया। ‘6 मिनट 39 सेकंड’ कीवर्ड टिकटॉक, इंस्टाग्राम और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म पर तेजी से सर्च किया जाने लगा। दावा किया गया कि यह फातिमा का निजी वीडियो है, लेकिन फातिमा ने इन सभी बातों को पूरी तरह से झूठा बताते हुए कहा कि यह उनके खिलाफ फैलाया गया डिजिटल झूठ है।
फातिमा जटोई पाकिस्तान के सिंध प्रांत से आती हैं और सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हैं। वह अपने वीडियो में सिंधी संस्कृति, पारंपरिक वेशभूषा, लोक संगीत और देसी जीवनशैली को प्रदर्शित करती हैं। उनके लाखों फॉलोअर्स हैं। वर्तमान में वह दुबई में रहकर कंटेंट बनाती हैं और कई बड़े ब्रांड्स के साथ काम कर चुकी हैं। उनकी पहचान एक मेहनती और संस्कृति-प्रेमी कंटेंट क्रिएटर की रही है, इसलिए उनके खिलाफ ऐसी अफवाहों ने लोगों को चौंका दिया।
जनवरी 2026 में, सोशल मीडिया पर अचानक यह दावा किया गया कि फातिमा का 6 मिनट और 39 सेकंड का एक वीडियो लीक हो गया है। वीडियो लीक की खबर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो गई, और लोग ‘6 minutes video’ सर्च करने लगे।
इन अफवाहों के बीच फातिमा जटोई खुद सामने आईं और उन्होंने स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने एक वीडियो जारी किया जिसमें वह हाथ में पवित्र कुरान लिए हुए दिखाई दीं। फातिमा ने कहा कि उन्होंने अपनी पहचान कड़ी मेहनत से बनाई है और जो वीडियो उनके नाम से फैलाया जा रहा है, वह पूरी तरह से AI और डीपफेक तकनीक से बनाया गया है। उन्होंने कहा कि उनका इस वीडियो से कोई लेना-देना नहीं है और उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
कई गुमनाम अकाउंट्स ने इसके लिंक होने का दावा किया, लेकिन जब साइबर विशेषज्ञों और फैक्ट-चेकर्स ने जांच की, तो ऐसा कोई वास्तविक वीडियो नहीं मिला। विशेषज्ञों ने बताया कि इस तरह के निश्चित समय वाले वीडियो के दावे अक्सर लोगों को फंसाने के लिए किए जाते हैं। ऐसे लिंक्स पर क्लिक करने से फोन में वायरस आ सकता है या व्यक्तिगत डेटा चोरी हो सकता है, इसलिए इनसे सावधान रहना जरूरी है।
फातिमा जटोई अकेली ऐसी इन्फ्लुएंसर नहीं हैं जिन्हें इस तरह के डिजिटल उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है। अतीत में भी कई पाकिस्तानी महिला कंटेंट क्रिएटर्स के नाम पर फर्जी और मॉर्फ्ड वीडियो प्रसारित किए गए हैं। यह दिखाता है कि नई तकनीक का कैसे दुरुपयोग किया जा रहा है। साइबर विशेषज्ञों की स्पष्ट सलाह है कि ऐसे सनसनीखेज दावों पर भरोसा न करें और किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें।
