ईपीएफओ का ‘कर्मचारी नामांकन अभियान 2025’ शुरू, लाखों श्रमिकों को मिलेगा सामाजिक सुरक्षा कवच
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने देश भर के लाखों श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा कवरेज प्रदान करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल की है। संगठन ने ‘कर्मचारी नामांकन अभियान 2025’ (ईईसी-2025) की शुरुआत की है, जिसका मुख्य लक्ष्य उन पात्र कर्मचारियों को ईपीएफओ की विभिन्न योजनाओं से जोड़ना है, जो अब तक इससे वंचित थे। इस अभियान की घोषणा अपर केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त (बिहार एवं झारखंड), सूरज शर्मा ने की, जिसमें उन्होंने सभी नियोक्ताओं से इस सीमित अवधि की योजना का लाभ उठाने का आग्रह किया।
यह विशेष अभियान 1 नवंबर, 2025 से शुरू होकर 30 अप्रैल, 2026 तक चलेगा। श्री शर्मा ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा कर्मचारी भविष्य निधि एवं विविध उपबंध अधिनियम, 1952 के तहत अधिसूचित यह योजना उन श्रमिकों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए बनाई गई है, जिन्हें अभी तक भविष्य निधि, पेंशन और बीमा जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा था। इसका उद्देश्य नियोक्ताओं को अपने कर्मचारियों को नामांकित करने के लिए प्रोत्साहित करना है, जिससे श्रमिकों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
अभियान की एक प्रमुख विशेषता यह है कि नियोक्ताओं को पिछली चूकों को नियमित करने के लिए बड़ी राहत दी गई है। क्षतिपूर्ति की दर को घटाकर मात्र 100 रुपये एकमुश्त कर दिया गया है। यह रियायती दर तीनों योजनाओं – कर्मचारी भविष्य निधि योजना, कर्मचारी जमा-निक्षेप बीमा योजना और कर्मचारी पेंशन योजना – पर लागू होगी। नियोक्ताओं को अपने पात्र कर्मचारियों के लिए यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) को फेस ऑथेंटिकेशन टेक्नोलॉजी से सत्यापित कराना होगा और सभी आवश्यक घोषणाएं ईपीएफओ पोर्टल पर ऑनलाइन करनी होंगी।
सूरज शर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि वे प्रतिष्ठान भी इस योजना का लाभ उठा सकते हैं जो वर्तमान में जांच कार्यवाही का सामना कर रहे हैं, बशर्ते घोषणा निर्धारित शर्तों के अंतर्गत और पूरी तरह से सही दी जाए। उन्होंने सख्त चेतावनी दी कि यदि कोई नियोक्ता गलत जानकारी देता है, तो उसकी घोषणा अमान्य मानी जाएगी और वह दंडात्मक कार्रवाई के लिए उत्तरदायी होगा। पारदर्शिता और सटीकता इस अभियान की सफलता के लिए महत्वपूर्ण हैं।
अपर केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त ने बताया कि ईईसी-2025 के अंतर्गत घोषित किए गए अतिरिक्त कर्मचारियों को प्रधानमंत्री-विकसित भारत रोजगार योजना (पीएमवीबीआरवाई) के लाभ से भी जोड़ा जाएगा, जिससे उन्हें दोहरा फायदा मिलेगा। उन्होंने इस अभियान को नियोक्ताओं के लिए अपनी पिछली कानूनी देनदारियों को कम करने और कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने का एक “सुनहरा अवसर” बताया। यह पहल न केवल श्रमिकों के भविष्य को सुरक्षित करेगी बल्कि संगठित क्षेत्र में सामाजिक सुरक्षा कवरेज के विस्तार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
