0

पीलीभीत में 14 साल से राशनकार्ड लक्ष्य स्थिर, लाखों परिवार सरकारी लाभ से वंचित

By Nov 20, 2025

पीलीभीत जनपद में जनसंख्या में लगातार वृद्धि के बावजूद, राशनकार्डों के लिए निर्धारित लक्ष्य पिछले 14 वर्षों से अपरिवर्तित है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, जिले की आबादी 20,31,007 थी, जिसके आधार पर 3,97,296 राशनकार्डों से 16,33,052 यूनिटें जुड़ी थीं, जिन्हें प्रतिमाह सरकारी राशन मिलता है।

हालांकि, पिछले एक दशक से अधिक समय में जिले की अनुमानित आबादी बढ़कर लगभग 24.50 लाख तक पहुंच गई है, जिसका अर्थ है कि साढ़े चार लाख से अधिक लोग बढ़ चुके हैं। इस विसंगति के कारण नए और बढ़ते परिवार सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाले सस्ते राशन से वंचित रह रहे हैं। लक्ष्य न बढ़ने के कारण लाखों लोग इस महत्वपूर्ण योजना का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।

कार्ड बनवाने के लिए लोग विभिन्न सरकारी दफ्तरों, जैसे ब्लॉक, तहसील से लेकर जिला मुख्यालय तक चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल रही है। कई परिवार एक या दो साल से प्रयास कर रहे हैं, जबकि सैकड़ों ऐसे भी हैं जिन्होंने बार-बार की निराशा के बाद उम्मीद ही छोड़ दी है। राशनकार्ड न होने की वजह से इन परिवारों को महंगे दामों पर अनाज खरीदना पड़ रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ रहा है।

इस समस्या पर विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जनपद की आबादी के अनुसार राशनकार्ड का लक्ष्य निर्धारित है। शहरी क्षेत्रों में 64 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 80 प्रतिशत आबादी को लक्षित किया गया है। यह माना जाता है कि शेष प्रतिशत आबादी सक्षम है और उन्हें सस्ते राशन की आवश्यकता नहीं है।

हालांकि, सूत्रों के अनुसार, विभाग अपात्रों के राशनकार्ड निरस्त कर पात्रों को जोड़ने का प्रयास कर रहा है। पिछले वर्षों में बड़ी संख्या में अपात्रों को हटाकर जरूरतमंदों के नए राशनकार्ड बनाए गए हैं और यह प्रक्रिया जारी है। अंत्योदय कार्डधारकों को प्रति कार्ड 35 किलो मुफ्त राशन (20 किलो चावल, 15 किलो गेहूं) और कभी-कभी सस्ते दामों पर चीनी मिलती है। वहीं, पात्र गृहस्थी उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट पांच किलो राशन (3 किलो चावल, 2 किलो गेहूं) मिलता है। विभाग का प्रयास है कि कोई भी पात्र व्यक्ति राशन से वंचित न रहे, लेकिन स्थिर लक्ष्य एक बड़ी बाधा बना हुआ है।

About

Journalist covering latest updates.

साझा करें