पहचान पत्र की गड़बड़ी ने रोकी 16 जोड़ों की शादी, सामूहिक विवाह योजना पर उठे सवाल
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत रामपुर में आयोजित समारोह में 16 जोड़ों के विवाह सपने अधूरे रह गए। योजना के अंतर्गत कुल 1045 जोड़ों का चयन हुआ था, लेकिन पहचान पत्र में अंतर और बायोमेट्रिक मिलान की समस्या के चलते केवल 834 जोड़ों के ही फेरे हो सके। इस घटना ने सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आयोजन में 1045 जोड़ों के चयन के बावजूद 850 के विवाह संपन्न होने की जानकारी दी गई थी, जो बाद में घटकर 834 रह गई। 16 जोड़े ऐसे थे जो पहचान की प्रक्रिया में फंस गए और उनकी शादी टल गई। अधिकारियों का कहना है कि दर्शाए गए तथ्यों और बायोमेट्रिक पहचान में कुछ अंतर पाए जाने के कारण फिलहाल उनका विवाह संपन्न नहीं कराया गया।
इस बार मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में प्रति जोड़े पर एक लाख रुपये का बजट व्यय किया गया, जो पिछले 51 हजार रुपये के बजट से काफी अधिक है। इस बढ़ी हुई राशि से अधिक संख्या में लाभार्थियों के जुड़ने की उम्मीद थी। एक लाख रुपये के बजट में 60 हजार रुपये लाभार्थी के खाते में, 25 हजार का उपहार सामग्री और 15 हजार रुपये भोजन व पंडाल व्यवस्था पर व्यय करने के निर्देश हैं।
समाज कल्याण अधिकारी के अनुसार, बायोमेट्रिक मशीन की व्यवस्था पहचान के लिए की गई थी। कुछ जोड़ों में वर या वधू का आधार कार्ड अपडेट न होने के कारण मशीन पहचान नहीं कर सकी। उन्होंने बताया कि सभी लाभार्थियों को पहले ही आधार अपडेट कराने की सूचना दी गई थी।
विवाह समारोह में सैदनगर विकास खंड के सर्वाधिक 173 जोड़े शामिल हुए। इसके अलावा शाहबाद, चमरौआ, मिलक, बिलासपुर, स्वार, केमरी, मसवासी, टांडा, दढियाल और नरपतनगर क्षेत्रों से भी जोड़े आए।
इस बीच, विश्व हिंदू महासंघ के जिलाध्यक्ष ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर विवाह समारोह में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है। उन्होंने फर्जी लाभार्थियों और अन्य गड़बड़ियों का हवाला देते हुए निष्पक्ष जांच की गुहार लगाई है।
