पायलटों की थकान पर DGCA का कड़ा रुख, उड़ानों के घंटों में कटौती के निर्देश
हवाई यात्रा को और सुरक्षित बनाने की दिशा में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। डीजीसीए ने पायलटों में बढ़ती थकान की समस्या से निपटने के लिए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (एफडीटीएल) नियमों को कड़ा कर दिया है। इन नए नियमों के तहत, पायलटों के लिए आराम की अवधि को बढ़ाया गया है, वहीं रात के समय की उड़ानों के घंटों में कटौती की गई है।
इन बदलावों का उद्देश्य पायलटों को पर्याप्त आराम देना और उनकी सतर्कता के स्तर को बनाए रखना है, जिससे उड़ान के दौरान किसी भी संभावित जोखिम को कम किया जा सके। यह कदम तब उठाया गया है जब डीजीसीए को विमानन कंपनियों से थकान से संबंधित रिपोर्ट प्राप्त करने में देरी का पता चला, विशेषकर जुलाई से एफडीटीएल के पहले चरण के लागू होने के बाद।
डीजीसीए ने विमानन कंपनियों के लिए यह अनिवार्य कर दिया है कि वे अपने रोस्टर तैयार करने वाले शेड्यूलर और डिस्पैचर को थकान प्रबंधन का प्रशिक्षण दें। इसके अतिरिक्त, सभी विमानन कंपनियों को अब हर तीन महीने में डीजीसीए को थकान (फटीग) से संबंधित एक विस्तृत रिपोर्ट जमा करनी होगी। इस रिपोर्ट में उन क्रू मेंबर्स की संख्या का उल्लेख करना होगा जिन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त किया है, प्राप्त हुई थकान रिपोर्टों की संख्या, और स्वीकार या अस्वीकार की गई रिपोर्टों का विवरण शामिल होगा। यदि कोई रिपोर्ट अस्वीकार की जाती है, तो उसका कारण भी बताना होगा।
प्रारंभ में, इंडिगो और टाटा ग्रुप की एअर इंडिया जैसी प्रमुख घरेलू विमानन कंपनियों ने इन बदले हुए नियमों के कुछ प्रावधानों का विरोध किया था। हालांकि, सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए, डीजीसीए अपने फैसले पर कायम है। बदले हुए नियमों का दूसरा चरण, कुछ छूटों के साथ, एक नवंबर से प्रभावी हुआ है, जो विमानन उद्योग में एक नई मानक प्रक्रिया स्थापित करेगा। यह कदम हवाई यात्रा की सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
