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पौष माह 2025: खरमास क्यों रोकता है मांगलिक कार्य, जानें धार्मिक कारण

By Dec 6, 2025

पौष माह, जो 5 दिसंबर 2025 से प्रारंभ हो चुका है और 3 जनवरी 2026 को पौष पूर्णिमा के साथ समाप्त होगा, में धार्मिक कार्यों को लेकर विशेष मान्यताएं हैं। पंचांग के अनुसार, इस माह में 16 दिसंबर से खरमास का आरंभ हो जाएगा। धार्मिक दृष्टि से पवित्र माने जाने वाले इस पूरे महीने में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश और नए व्यवसाय की शुरुआत जैसे मांगलिक कार्यों को वर्जित किया गया है।

पौष माह में मांगलिक कार्यों के न होने का सबसे प्रमुख कारण खरमास या धनु संक्रांति का पड़ना है। जब सूर्य देव धनु राशि में प्रवेश करते हैं, तो इस अवधि को धनु संक्रांति कहा जाता है। धनु राशि का स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सूर्य के बृहस्पति की राशि में प्रवेश करने से सूर्य का तेज गुरु के तेज को कुछ हद तक कम कर देता है। विवाह और अन्य शुभ कार्यों के लिए गुरु और शुक्र की मजबूत स्थिति को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। गुरु के कमजोर होने की स्थिति में, इस अवधि में किए गए शुभ कार्यों के सकारात्मक परिणाम नहीं मिलते और वे रिश्ते सफल नहीं हो पाते। यही कारण है कि इस दौरान शुभ कार्यों को टाल दिया जाता है।

खरमास को लेकर एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है। कहा जाता है कि एक बार सूर्य देव अपने सात घोड़ों वाले रथ पर सवार होकर ब्रह्मांड का भ्रमण कर रहे थे। इस लंबी यात्रा से उनके घोड़े थक गए और उन्होंने पानी पीने व आराम करने के लिए विश्राम किया। सूर्य देव ने अपने घोड़ों को आराम देने के लिए उन्हें एक तालाब के किनारे रोक दिया।

रथ को आगे बढ़ाने के लिए, सूर्य देव ने घोड़ों के स्थान पर गधों (जिन्हें खर भी कहा जाता है) को जोड़ा। गधे बहुत धीमी गति से चल रहे थे, जिसके कारण सूर्य देव के रथ की गति भी काफी धीमी हो गई। इस मंद गति और घोड़ों के स्थान पर गधों के जुटने के कारण ही इस अवधि को ‘खरमास’ कहा जाने लगा और इसे शुभ कार्यों के लिए अनुचित माना जाने लगा।

यह भी उल्लेखनीय है कि खरमास के आरंभ होने से कुछ दिन पहले ही वैवाहिक लग्न समाप्त हो जाते हैं, जिससे इस अवधि में विवाह जैसे महत्वपूर्ण संस्कार नहीं हो पाते।

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