पालतू कुत्ते के काटने से बच्ची की मौत: मुजफ्फरपुर में दहशत, निगम की लापरवाही पर सवाल
मुजफ्फरपुर में पालतू कुत्ते के हमले से एक तीन वर्षीय बच्ची की दुखद मौत के बाद शहरवासियों में दहशत का माहौल है। इस घटना ने एक बार फिर पालतू कुत्तों के निबंधन और उनके मालिकों के नियंत्रण को लेकर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर में 400 से अधिक पालतू कुत्ते हैं, जिनमें कई खतरनाक विदेशी नस्ल के भी शामिल हैं, लेकिन नगर निगम के पास इनका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड या निबंधन उपलब्ध नहीं है।
सूत्रों के अनुसार, हाल ही में एसकेएमसीएच में इलाज के दौरान एक पालतू कुत्ते के काटने से तीन साल की बच्ची ने दम तोड़ दिया। इस घटना से पहले भी शहरवासी आवारा कुत्तों के आतंक से परेशान थे, लेकिन अब पालतू कुत्तों से भी उन्हें डर लगने लगा है। कई लोग अपने पालतू कुत्तों, खासकर विदेशी नस्ल के खतरनाक कुत्तों को सुबह-शाम घुमाने के लिए निकलते हैं। कुछ मामलों में, ये कुत्ते नियंत्रण से बाहर हो जाते हैं और राहगीरों के लिए खतरा बन जाते हैं।
नागरिकों का कहना है कि नगर निगम आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए भले ही प्रयास कर रहा हो, लेकिन घरों में पल रहे पालतू कुत्तों, विशेषकर खतरनाक नस्लों पर उसका कोई नियंत्रण नहीं है। पालतू कुत्ते रखने वाले अधिकांश लोगों ने अपने जानवरों का नगर निगम से निबंधन भी नहीं कराया है, जो कि एक अनिवार्य प्रक्रिया होनी चाहिए। पुरानी बाजार निवासी संजीव कुमार ने बताया, “विदेशी नस्ल का कुत्ता पालने वाले लोग अक्सर उन्हें बिना पट्टे के घुमाते हैं और कई बार वे पालक के नियंत्रण से छूट जाते हैं, जिससे आम लोगों को परेशानी होती है।”
बच्ची की मौत के बाद, स्थानीय लोगों ने पालतू कुत्तों के मालिकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उनकी मांग है कि यदि पालतू कुत्ते के काटने से कोई हादसा होता है, तो उसके मालिक को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और निबंधन प्रक्रिया को अनिवार्य बनाया जाना चाहिए। यह घटना नगर निगम को नींद से जगाने वाली है और अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस दिशा में क्या कदम उठाता है। यदि कुत्तों को पालने के लिए एक प्रभावी व्यवस्था और नियम लागू नहीं किए जाते हैं, तो शहरवासियों की चिंताएं और परेशानियां कम नहीं होंगी।
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