पाकिस्तान मूल के अमेरिकी नागरिक की गिरफ्तारी, बड़े हमले की योजना का खुलासा
अमेरिका के डेलावेयर में पाकिस्तान मूल के एक 25 वर्षीय पूर्व छात्र को हथियारों के बड़े जखीरे, बॉडी आर्मर और एक हस्तलिखित मेनिफेस्टो के साथ गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का मानना है कि इस गिरफ्तारी से एक बड़े सामूहिक गोलीबारी के हमले को टाल दिया गया है।
लुकमान खान नाम के इस युवक को 24 नवंबर की आधी रात के करीब तब गिरफ्तार किया गया जब पुलिस ने उसे विलमिंगटन के एक बंद पार्क में अपनी पिकअप ट्रक में बैठे पाया और उसके व्यवहार पर संदेह हुआ। जांचकर्ताओं ने बताया कि उसकी गाड़ी में जो मिला वह बेहद चिंताजनक था। इसमें एक .357 ग्लॉक पिस्तौल थी जिसे सेमी-ऑटोमैटिक राइफल में बदलने के किट के साथ फिट किया गया था, साथ ही 27 राउंड की कई मैगजीन, बॉडी आर्मर प्लेट्स और एक नोटबुक भी थी जिसमें कैंपस में हमले की योजनाएं लिखी हुई थीं।
सूत्रों के अनुसार, नोटबुक में डेलावेयर विश्वविद्यालय पुलिस मुख्यालय का नक्शा भी था, जिसमें प्रवेश और निकास बिंदुओं को चिह्नित किया गया था। इसमें ‘किल ऑल – मार्टडम’ जैसे वाक्यांश बार-बार लिखे हुए थे। अभियोजन पक्ष ने इन लेखों को पूर्व-नियोजित हमले की योजना और युद्ध की तकनीकें बताया है।
आरोपी खान ने कथित तौर पर जांचकर्ताओं को बताया कि शहीद के रूप में मरना सबसे महान कार्यों में से एक है। नोटबुक में विश्वविद्यालय के एक पुलिस अधिकारी का नाम भी था, हालांकि अभियोजन पक्ष ने कहा कि उसका मकसद अभी भी स्पष्ट नहीं है। खान, जो युवावस्था में पाकिस्तान से अमेरिका आया था और अब अमेरिकी नागरिक है, उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था।
बाद में एफबीआई ने खान के विलमिंगटन स्थित घर की तलाशी ली, जहां उसे और भी हथियार मिले। इनमें एक एआर-स्टाइल राइफल, एक अवैध मशीन-गन कन्वर्जन डिवाइस से लैस दूसरी ग्लॉक पिस्तौल, 11 विस्तारित मैगजीन, हॉलो-पॉइंट गोलियां और एक टैक्टिकल वेस्ट शामिल थे। जब्त किए गए किसी भी हथियार का पंजीकरण नहीं था।
हस्तलिखित नोटबुक में खान ने अतिरिक्त हथियारों, उनके इस्तेमाल के तरीकों और हमले के बाद कानून प्रवर्तन से बचने की युक्तियों पर भी चर्चा की थी। इसमें विश्वविद्यालय के पुलिस विभाग के एक सदस्य का नाम और एक इमारत का लेआउट भी शामिल था, जिसके नीचे ‘यूडी पुलिस स्टेशन’ लिखा था।
संघीय अभियोजकों ने उस पर अवैध रूप से मशीन गन रखने का आरोप लगाया है, हालांकि अधिकारियों का कहना है कि जांच जारी रहने पर और भी आरोप लग सकते हैं। यदि दोषी पाया गया, तो उसे 10 साल तक की जेल हो सकती है।
