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ऑपरेशन सिंदूर: पाकिस्तान की घबराहट और भारत की लॉबिंग का खुलासा, FARA दस्तावेज जारी

By Jan 7, 2026

अमेरिका के फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट (FARA) के तहत सार्वजनिक हुए दस्तावेजों ने भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पाकिस्तान की बेचैनी को उजागर किया है। रिपोर्टों के अनुसार, अप्रैल में हुए इस सैन्य अभियान के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका में अपने राजनयिकों के माध्यम से युद्धविराम के लिए जोरदार लॉबिंग की थी।

पाकिस्तान की लॉबिंग का खुलासा

FARA के तहत अमेरिकी न्याय विभाग में दाखिल दस्तावेजों से पता चला है कि पाकिस्तानी राजनयिकों ने अप्रैल के अंत में चार दिवसीय ऑपरेशन सिंदूर के बाद संघर्ष विराम के लिए अमेरिकी अधिकारियों से करीब 60 बार संपर्क किया था। इसमें ईमेल, फोन कॉल और व्यक्तिगत बैठकें शामिल थीं। पाकिस्तान ने ट्रम्प प्रशासन तक अपनी पहुंच बनाने और कूटनीतिक फैसलों को प्रभावित करने के लिए छह लॉबिंग फर्मों पर लगभग 45 करोड़ रुपये खर्च किए थे।

भारत की लॉबिंग और कूटनीतिक प्रयास

वहीं, दूसरी ओर, अमेरिकी लॉबिंग फर्म एसएचडब्ल्यू पार्टनर्स एलएलसी की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय दूतावास ने भी अमेरिकी सरकार और अधिकारियों के साथ संपर्क बढ़ाने के लिए फर्म की सेवाएं ली थीं। अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच, फर्म ने व्हाइट हाउस चीफ ऑफ स्टाफ, अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव और नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के अधिकारियों से संपर्क स्थापित करने में मदद की। इस दौरान भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी मीडिया कवरेज जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

विदेश मंत्रालय का पक्ष

भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि आवश्यकतानुसार लॉबिंग फर्मों का सहारा लेना एक स्थापित और कानूनी प्रथा है। मंत्रालय ने कहा कि अमेरिकी न्याय विभाग की वेबसाइट पर ऐसे सभी संपर्कों का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध है और इसे मध्यस्थता के तौर पर देखना गलत है।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

कांग्रेस ने इन रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि 10 मई को महत्वपूर्ण संपर्क हुए थे, जिसके बाद ऑपरेशन सिंदूर को रोकने का पहला ऐलान अमेरिका की ओर से किया गया था। कांग्रेस नेता ने संदेह जताया कि क्या सैन्य कार्रवाई रोकने के फैसले में व्यापार से जुड़े पहलू भी शामिल थे।

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