आगरा के स्कूल में सिर्फ 11 छात्र, 7 टीचर: बिजली-पानी की किल्लत से शिक्षा पर असर
आगरा के महाराजा सूरज मल इंटर कॉलेज की दयनीय स्थिति सामने आई है, जहां 1965 में स्थापित होने के बावजूद वर्तमान में केवल 11 छात्र नामांकित हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन 11 छात्रों को पढ़ाने के लिए प्रधानाचार्य सहित सात शिक्षक मौजूद हैं।
बुनियादी सुविधाओं का अभाव
विद्यालय के शिक्षकों ने बताया कि स्कूल में पिछले 20 वर्षों से बिजली और साफ पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। बिजली की समस्या के कारण गर्मी में शिक्षकों को हाथ के पंखे से काम चलाना पड़ता है। कागजों में भले ही बिजली और हैंडपंप की व्यवस्था दर्ज हो, लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है। पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता है। जिला विद्यालय निरीक्षक को कई बार पत्र लिखकर इन समस्याओं से अवगत कराया गया है, लेकिन समाधान नहीं निकला है।
नामांकन में गिरावट का कारण
प्रधानाचार्य सीमा सिंह ने बताया कि स्थायी बिजली कनेक्शन न होने के कारण यह समस्या बनी हुई है। पुराने बिजली बिल के विवाद के चलते अस्थायी कनेक्शन भी काट दिए जाते हैं। पूर्व प्रधानाचार्य द्वारा सुविधाओं को जुटाने के लिए कोई प्रयास न करने और अभिभावकों को आश्वासन न देने के कारण नामांकन में भारी गिरावट आई है।
प्रबंधन की भूमिका पर सवाल
विद्यालय के रखरखाव और सुविधाओं की जिम्मेदारी प्रबंधन समिति की होती है, लेकिन प्रधानाचार्य का कहना है कि प्रबंधन समिति का पता नहीं है और संचालन को लेकर मामला कोर्ट में चल रहा है। सुविधाओं के अभाव में अभिभावक अपने बच्चों को इस स्कूल में भेजने से कतरा रहे हैं। शहर के बीच स्थित इस स्कूल की बदहाली शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
