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बांका में अब जहां-तहां थूकने पर होगी जेल! 4 महीने में 26 लोगों पर केस दर्ज, जानें क्यों?

By Dec 10, 2025

बांका में सार्वजनिक जगहों पर थूकना अब महंगा हो गया है। नगर परिषद ने पिछले चार महीनों में 26 मामले दर्ज किए हैं और थूकने वालों पर जुर्माना लगाया जा रहा है। कभी बांका कोर्ट की सीढ़ियों से लेकर दीवारों के कोने तक पान व गुटखा की पीकों से भरे रहते थे। पर इन दिनों यहां स्वच्छता का वास है, क्योंकि नियमों को कड़ाई से लागू किया जा रहा है। स्वच्छता को बनाए रखने के लिए अदालत ने बीते चार महीनों में 26 से अधिक लोगों पर कार्रवाई की है। कोर्ट परिसर या अन्य सार्वजनिक संपत्तियों को गंदा करने पर बिहार संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम 1987 के तहत केस दर्ज किया जा रहा है।

जिला जज सत्यभूषण आर्य के जुलाई माह में योगदान के बाद इस नियम का सख्ती से पालन किया जा रहा है। पदभार ग्रहण करने के बाद जिला जज ने जब कोर्ट परिसर का निरीक्षण किया तो हर जगह गंदगी मिली। पान और गुटखा खाकर थूकने की प्रवृति को देखते हुए इस पर अंकुश के लिए नियम का सख्ती से पालन कराया जाने लगा। इसके लिए कोर्ट में तैनात न्यायायिक अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों और सुरक्षा गार्डों से निगरानी कराई जा रही है। इसके लिए सीसीटीवी कैमरे की मदद भी ली जा रही है। इस कारण अब तक एक अधिवक्ता सहित 26 पर केस दर्ज हुए हैं। गत सोमवार व मंगलवार को भी थूकने पर दो लोगों के विरुद्ध टाउन थाने में केस दर्ज कराया गया है।

इस बाबत जिला जज सत्यभूषण आर्य का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों को गंदा करना कानूनन अपराध है। यह समाज के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर डालता है। इसलिए कोर्ट प्रशासन ने यह सख्त कदम उठाया है। सभी लोग सार्वजनिक स्थलों को साफ रखने की जिम्मेदारी समझें। जिला जज ने कहा कि गंदगी से कई प्रकार की बीमारियां भी फैलती हैं। शहरी नागरिक भी जागरूक होकर इस नियम का पालन कराएं। अगर कोई सार्वजनिक जगह पर थूकते पकड़ा जाए तो कोई भी व्यक्ति उसके खिलाफ केस दर्ज करा सकता है। फिलहाल कोर्ट द्वारा केस दर्ज के बाद कुछ केस का ट्रायल भी चलाया जा रहा है।

इधर, नगर परिषद भी स्वच्छता अभियान को प्रभावी बनाने के लिए सक्रिय हो गई है। नगर परिषद द्वारा शहर में सार्वजनिक स्थानों पर थूकने वालों पर 500 से 1500 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा रहा है। नप के कार्यपालक पदाधिकारी सुमित्रानंदन ने कहा कि शहर में गंदगी फैलाने वालों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। विधिज्ञ संघ के महासचिव देवेंद्र कुमार चौधरी का कहना है कि यह राज्य में सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को बदसूरत बनाने या नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को रोकने के लिए बनाया गया कानून है। इस नियम को तोड़ने पर छह माह की सजा से लेकर जुर्माना का प्रविधान है।

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