12वीं के बाद अब 4 साल में ही बनें शिक्षक, शुरू होगा इंटीग्रेटेड Teacher Education प्रोग्राम
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप, देश में शिक्षक बनने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित और त्वरित किया जा रहा है। इसी कड़ी में, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से चार वर्षीय इंटीग्रेटेड Teacher Education प्रोग्राम (ITEP) शुरू करने की घोषणा की है। यह महत्वपूर्ण बदलाव उन लाखों विद्यार्थियों के लिए राहत लेकर आया है जो 12वीं के बाद सीधे शिक्षक बनने का सपना देखते हैं, क्योंकि अब उन्हें स्नातक और बीएड के लिए अलग-अलग पांच साल खर्च नहीं करने पड़ेंगे, बल्कि यह पूरा सफर चार साल में ही पूरा हो जाएगा। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि शिक्षा का आर्थिक बोझ भी कम होगा, जिसका सीधा लाभ ग्रामीण और मध्यमवर्गीय परिवारों को मिलेगा।
शिक्षक बनने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव
अब तक शिक्षक बनने के लिए छात्रों को पहले तीन साल का स्नातक और फिर दो साल का बीएड करना पड़ता था, जिसमें कुल पांच साल लगते थे। नए इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम (ITEP) के तहत, छात्र 12वीं के बाद सीधे बीए-बीएड या बीएससी-बीएड जैसे पाठ्यक्रमों में दाखिला ले सकेंगे। इन पाठ्यक्रमों में विषय ज्ञान के साथ-साथ शिक्षण प्रशिक्षण भी एक साथ दिया जाएगा, जिससे विद्यार्थी चार साल में ही दोनों डिग्रियां हासिल कर लेंगे। यह पहल राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा निर्धारित मानकों की जांच के बाद शुरू की जा रही है, जिसने विश्वविद्यालय की आधारभूत संरचना और संसाधनों को संतोषजनक पाया है।
प्रवेश प्रक्रिया और पात्रता
इस चार वर्षीय कार्यक्रम में प्रवेश राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा के माध्यम से होगा, जिसका आयोजन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) करेगी। वर्ष 2026 में 12वीं की परीक्षा देने वाले विद्यार्थी और पहले से उत्तीर्ण छात्र निर्धारित पात्रता के आधार पर आवेदन कर सकेंगे। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया एजेंसी की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से पूरी की जाएगी, जिसकी अंतिम तिथि 10 मार्च तय की गई है। प्रवेश पूरी तरह से मेरिट, आरक्षण नीति और काउंसिलिंग प्रक्रिया के आधार पर सुनिश्चित किया जाएगा। बीए-बीएड और बीएससी-बीएड दोनों में 50-50 सीटों के एक-एक सेक्शन को स्वीकृति मिली है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का प्रभाव
यह इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की मूल भावना के अनुरूप है, जो विषय ज्ञान के साथ-साथ व्यवहारिक प्रशिक्षण, डिजिटल माध्यमों के उपयोग, शोध आधारित अध्ययन और विद्यालयी अनुभव पर विशेष जोर देती है। पाठ्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को स्कूलों में इंटर्नशिप का अवसर मिलेगा, जिससे वे वास्तविक कक्षा वातावरण को समझ सकेंगे और उनका प्रशिक्षण केवल सैद्धांतिक नहीं बल्कि व्यवहारिक अनुभवों से भी जुड़ा होगा। इसमें नई शिक्षण तकनीकों, डिजिटल माध्यम से पढ़ाने की विधियों, कक्षा प्रबंधन, विद्यार्थियों की मनोवैज्ञानिक समझ और मूल्यांकन पद्धतियों को भी शामिल किया जाएगा, ताकि भविष्य के शिक्षक केवल पाठ पढ़ाने वाले नहीं, बल्कि मार्गदर्शक और नवाचार करने वाले बनें। विश्वविद्यालय प्रशासन कार्यक्रम की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नियमित रिपोर्टिंग और मानकों का पालन सुनिश्चित करेगा।
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