नोएडा डेथ प्वाइंट: इंजीनियर की मौत के बाद लापरवाह फाइलें दौड़ीं, प्रशासन की बड़ी चूक
नोएडा के सेक्टर-150 में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की सड़क दुर्घटना में हुई मौत ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि कैसे शिकायतों को अनसुना किया जाता है और जनता की सुरक्षा को नजरअंदाज किया जाता है। युवराज की मौत से पहले यदि प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई की होती, तो आज एक परिवार को यह दुखद घड़ी नहीं देखनी पड़ती।
स्थानीय निवासियों ने लगभग दो साल पहले ही इस 90 डिग्री के खतरनाक मोड़ को ‘डेथ प्वाइंट’ के रूप में चिन्हित कर इसकी घातक प्रकृति के बारे में प्राधिकरण के सीईओ को मानचित्र सहित अवगत कराया था। सीईओ ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए अधीनस्थ अधिकारियों को रिपोर्ट तैयार कर समाधान निकालने के निर्देश दिए थे।
इसके बावजूद, जेई और ऐई स्तर पर रिपोर्ट तैयार करने में घोर लापरवाही बरती गई। फाइलें सर्किल प्रभारी, उप महाप्रबंधक सिविल, महाप्रबंधक सिविल, ओएसडी और एसीईओ जैसे कई स्तरों पर सिर्फ टिप्पणी और वार्ता के नाम पर एक-दूसरे की मेज पर घूमती रहीं। रिपोर्ट कभी सीईओ तक नहीं पहुंची और फाइल महाप्रबंधक सिविल की मेज पर धूल फांकती रही।
इस मुद्दे को लेकर स्थानीय निवासियों के साथ-साथ सांसद डॉक्टर महेश शर्मा और दादरी विधायक तेजपाल नागर ने भी सीईओ और जिलाधिकारी को पत्र लिखकर ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया था। आठ से अधिक सोसायटियों ने हस्ताक्षर अभियान चलाकर और 20 सूत्रीय शिकायतें सौंपकर साइन बोर्ड, रिफ्लेक्टर और स्ट्रीट लाइट की कमी को उजागर किया था। युवराज की मौत से महज 15 दिन पहले भी इसी मोड़ पर एक ट्रक दुर्घटनाग्रस्त होकर पानी के गड्ढे में गिर गया था, लेकिन फिर भी कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।
इस दुखद घटना के बाद, जब सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की जान चली गई, तब प्रशासन की नींद टूटी। आनन-फानन में बिना किसी औपचारिक अप्रूवल के फाइलें दौड़ाई जाने लगीं और मौके पर कार्य शुरू कर दिए गए। अब यह फाइल बिना किसी सवाल-जवाब के विभिन्न मेजों से स्वीकृत हो रही है। इस लापरवाही का खामियाजा एक युवा इंजीनियर को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा है, जो प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है।
