बिना तलाक दूसरे के साथ रहने पर गुजारा भत्ता नहीं, Allahabad High Court ने लगाई रोक
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि कोई महिला अपने पहले पति से कानूनी रूप से तलाक लिए बिना दूसरे व्यक्ति के साथ रहती है, तो वह दूसरे व्यक्ति से गुजारा भत्ता पाने की हकदार नहीं है। हाई कोर्ट ने चित्रकूट की परिवार अदालत के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें ऐसी महिला को गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया गया था।
न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह की पीठ ने संतोष कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि विपक्षी महिला (रन्नो) उसकी वैध पत्नी नहीं है। महिला ने शारदा प्रसाद नामक व्यक्ति से शादी की थी और उससे तलाक लिए बिना ही याचिकाकर्ता के साथ रहने लगी।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि महिला ने परिवार अदालत में धारा 125 सीआरपीसी के तहत गुजारा भत्ते की अर्जी दी थी। इस पर प्रधान न्यायाधीश ने महिला को 2,000 रुपये और उसकी बच्ची को 1,000 रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था। याचिकाकर्ता ने इसे चुनौती देते हुए कहा कि चूंकि महिला उसकी वैध पत्नी नहीं है, इसलिए उसे गुजारा भत्ता पाने का अधिकार नहीं है।
याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि महिला ने स्वीकार किया है कि उसने याचिकाकर्ता से शादी की है, लेकिन इस शादी में ‘सप्तपदी’ (सात फेरे) नहीं हुई थी। हाई कोर्ट ने इस मुद्दे को विचारणीय मानते हुए परिवार अदालत के आदेश पर रोक लगा दी और विपक्षी महिला व बच्ची को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च 2026 को होगी।
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