हरिभजन से क्षीण होते हैं बड़े से बड़े पाप, आगरा में संपन्न हुई मोरारी बापू की रामकथा | agra news
आगरा के फतेहाबाद रोड स्थित जेपी वेडिंग ग्राउंड पर पिछले नौ दिनों से चल रही आध्यात्मिक रामकथा का बुधवार को विधि-विधान के साथ समापन हो गया [agra news]। कथा के अंतिम दिन प्रख्यात संत मोरारी बापू ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि हरिभजन करते-करते जीवन के प्रबल दोष और तीव्र पाप भी अपने आप क्षीण हो जाते हैं। जिस व्यक्ति के अवगुण भजन के माध्यम से मिटने लगते हैं, वह धीरे-धीरे ऋषि भाव की ओर अग्रसर होने लगता है।
बापू ने अपने प्रवचन में आगे कहा कि साधुता कोई पदवी नहीं बल्कि व्यक्ति का सहज स्वभाव है। सबल होने के बावजूद सरल बने रहना और नेत्रों में करुणा का भाव रखना ही परम साधुता की पहचान है। रामकथा किसी एक संप्रदाय विशेष की नहीं बल्कि संपूर्ण जगत के कल्याण की कथा है। जीवन में पहले कथा का श्रवण आवश्यक है, उसके पश्चात ही उसका पाठ सार्थक होता है। श्रवण मात्र से ही हृदय में भक्ति और प्रेम का बीजारोपण होता है।
युवा पीढ़ी को संदेश देते हुए बापू ने कहा कि गुरु ही जीवन को सही दिशा देने वाली मुख्य शक्ति हैं, इसलिए युवावस्था में ही गुरु की शरण अवश्य लेनी चाहिए। उन्होंने सिख परंपरा के लंगर का स्मरण कराते हुए कहा कि समाज में ‘भजन करो और भोजन करो’ की संस्कृति को बढ़ावा मिलना चाहिए। इस आयोजन से स्थानीय स्तर पर धार्मिक और सामाजिक सौहार्द का माहौल देखने को मिला, जिससे शहरवासियों में आध्यात्मिक चेतना का संचार हुआ है।
