यूपी में State Capital Region के बेस मैप को मिली मंजूरी, लखनऊ के आसपास के जिलों का होगा विकास
दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में लखनऊ के आसपास के जिलों को मिलाकर स्टेट कैपिटल रीजन (UPSCR) विकसित करने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का पहला बड़ा पड़ाव पार करते हुए इसके बेस मैप को आधिकारिक मंजूरी मिल गई है। लखनऊ विकास प्राधिकरण में मण्डलायुक्त की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक में विभिन्न विभागों की सहमति के बाद इस पर मुहर लगाई गई। अब इस बेस मैप को एक्जीक्यूटिव कमेटी के सामने पेश किया जाएगा, जिसके बाद फाइनल रीजनल प्लान तैयार होगा। इस परियोजना के तहत कुल 26,741 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल को कवर किया जा रहा है।
इस स्टेट कैपिटल रीजन के दायरे में राजधानी लखनऊ के अलावा सीतापुर, उन्नाव, हरदोई, बाराबंकी और रायबरेली जिले शामिल हैं। इन सभी छह जनपदों में कनेक्टिविटी को मजबूत करने और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए व्यापक स्तर पर कार्ययोजना तैयार की गई है। इसमें ट्रांसपोर्टेशन एंड मोबिलिटी, अत्याधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, टूरिज्म और इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट से जुड़ी 30 प्रमुख परियोजनाओं को चिन्हित किया गया है। क्षेत्रीय सड़कों के विकास के साथ-साथ ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर और मेट्रो नेटवर्क जैसी परिवहन सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव है, जिससे आम जनता को आवागमन में सुगमता होगी।
परियोजना के तहत बेस मैप की प्रमाणिकता सुनिश्चित करने के लिए राजस्व, वन, रेलवे और लोक निर्माण विभाग समेत कुल 22 संस्थाओं से परामर्श लिया गया था। इसके अलावा सभी छह जिलों में सैटेलाइट डेटा के आधार पर 2,239 स्थानों पर स्थलीय सत्यापन (ग्राउंड ट्रूथिंग) का कार्य भी पूरा किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि इस रीजन के विकसित होने से न केवल उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यवसाय के नए रास्ते खुलेंगे। इससे शहरी और ग्रामीण इलाकों के बीच का अंतर कम होगा और क्षेत्रीय विकास को रफ्तार मिलेगी।
इसके अलावा राजधानी लखनऊ को सूचना प्रौद्योगिकी (IT) का एक बड़ा हब बनाने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। सीजी सिटी क्षेत्र में लगभग 421 करोड़ रुपये की बेस कीमत वाले भूखंड पर अत्याधुनिक आईटी पार्क विकसित करने की योजना पर काम शुरू हो गया है। इसे राजस्व सहभागिता (रेवेन्यू शेयर बेसिस) के आधार पर विकसित किया जाएगा ताकि तकनीकी कंपनियों को बढ़ावा दिया जा सके। इन सभी विकास कार्यों से आने वाले समय में प्रदेश की आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी तथा नागरिकों को बेहतर जीवन स्तर प्राप्त होगा।
