यूपी में अप्रैल से नया लेबर कोड बिल लागू, बेसिक पे का 50% होगा सैलरी का हिस्सा
केंद्र सरकार का नया लेबर कोड बिल अप्रैल माह से उत्तर प्रदेश में भी लागू होने की संभावना है। राज्य सरकार ने इस नए बिल को अपनाने के लिए अपनी आवश्यकताओं के अनुसार कुछ मामूली बदलाव किए हैं। संशोधित बिल को विधि विभाग के पास भेज दिया गया है। जनवरी में इसका प्रकाशन कर आपत्तियां मांगी जाएंगी, जिसके 45 दिन बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।
नए लेबर कोड बिल के तहत कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य होगा, जिसमें सेवा शर्तों और वेतन की जानकारी स्पष्ट रूप से लिखी होगी। फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट वाले कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी का प्रावधान भी किया गया है, जिसमें काम किए गए दिनों के अनुसार ग्रेच्युटी मिलेगी। ईपीएफ और ईएसआई का लाभ भी हर हाल में देना होगा।
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब कुल सैलरी का 50 प्रतिशत बेसिक पे रखना अनिवार्य होगा। इससे पहले कंपनियां ईपीएफ में अपनी हिस्सेदारी कम रखने के लिए बेसिक पे कम रखती थीं। अधिकारियों का कहना है कि इससे कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा, लेकिन ईपीएफ में योगदान बढ़ेगा। इसके अतिरिक्त, 40 वर्ष से अधिक आयु के कर्मचारियों का सालाना हेल्थ चेकअप भी कंपनियों को कराना होगा।
यह नया कानून उद्योगों के लिए इंस्पेक्टर राज को समाप्त करेगा। लेबर इंफोर्समेंट इंस्पेक्टर अब ‘फैसिलिटेटर’ के नाम से जाने जाएंगे और उनके अधिकार सीमित होंगे। वे मुकदमा दर्ज करने के बजाय कंपाउंड फी लगा सकेंगे, हालांकि बार-बार नियमों का उल्लंघन करने पर एफआईआर का प्रावधान बना रहेगा।
रिटर्न फाइलिंग की प्रक्रिया भी सरल होगी, जिसमें फैक्ट्री, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और ट्रेड यूनियनों को केवल आठ रजिस्टर पर सूचनाएं दर्ज करनी होंगी, जबकि अभी यह संख्या 78 है।
श्रमायुक्त मार्कण्डेय शाही ने बताया कि राज्य के अनुसार आवश्यक बदलावों के साथ बिल को अंतिम रूप दिया जा रहा है और अप्रैल से इसे लागू करने की पूरी तैयारी है।
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