एम्स गोरखपुर में दर्द मुक्त सर्जरी का नया युग: रीजनल एनेस्थीसिया से मिलेगा आराम
एम्स गोरखपुर में चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, जहाँ अब ऑपरेशन के बाद होने वाले दर्द को काफी हद तक कम किया जा रहा है। रीजनल एनेस्थीसिया और एनाल्जीसिया की आधुनिक तकनीकों के उपयोग से मरीजों के लिए सर्जरी का अनुभव अधिक सुरक्षित और दर्द रहित हो रहा है। यह नई पद्धति न केवल तत्काल दर्द से राहत देती है, बल्कि मरीजों को तेजी से ठीक होने और सामान्य जीवन में लौटने में भी सहायता करती है।
इस नई तकनीक के बारे में डॉक्टरों को जागरूक करने के लिए एम्स के एनेस्थीसियोलॉजी विभाग द्वारा एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में, अल्ट्रासाउंड की सहायता से शरीर के विशिष्ट हिस्सों को सुन्न करने और ऑपरेशन के बाद लंबे समय तक दर्द से मुक्ति दिलाने की प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी गई। डॉक्टरों को सिखाया गया कि कैसे दिमाग से जाने वाली नसों की पहचान कर, उनमें इंजेक्शन के माध्यम से दवा डालकर उस हिस्से को सुन्न किया जा सकता है।
एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष शर्मा ने बताया कि वर्तमान समय में रोगी की संपूर्ण सुरक्षा, ऑपरेशन के बाद दर्द से राहत और शीघ्र सामान्य जीवन में वापसी अत्यंत महत्वपूर्ण है। एनेस्थीसियोलॉजिस्ट की भूमिका इसमें निर्णायक होती है। उन्होंने बताया कि कई ऑपरेशनों में जनरल एनेस्थीसिया के साथ-साथ अल्ट्रासाउंड की मदद से नर्व ब्लॉक्स दिए जाते हैं, जिससे ऑपरेशन के बाद का दर्द काफी कम हो जाता है। कुछ विशेष मामलों में केवल रीजनल एनेस्थीसिया से ही सर्जरी संभव है, और जटिल मामलों में एक से अधिक नर्व ब्लॉक्स का संयोजन भी किया जाता है। एम्स की कार्यकारी निदेशक ने इस आयोजन की सराहना की।
नर्व ब्लॉक्स एक चिकित्सीय प्रक्रिया है जिसमें बेहोशी के डॉक्टर शरीर के किसी विशिष्ट हिस्से की नसों में दवा डालकर मस्तिष्क तक दर्द के संकेतों को अस्थायी रूप से रोकते हैं। इस तकनीक से मरीजों को ऑपरेशन के बाद होने वाले असहनीय दर्द से मुक्ति मिलती है, जिससे उनका ठीक होना आसान हो जाता है।
