आंध्र प्रदेश में मिली छिपकली की नई प्रजाति, तिरुमाला पहाड़ियों को समर्पित खास नाम
कोलकाता स्थित भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (जेडएसआई) के वैज्ञानिकों ने आंध्र प्रदेश के शेषाचलम बायोस्फीयर रिजर्व में छिपकली की एक बिल्कुल नई प्रजाति का पता लगाया है। इस महत्वपूर्ण खोज को ‘हेमीफिलोडेक्टाइलस वेंकटाद्रि स्पेसीज नोव’ नाम दिया गया है, जो तिरुमाला की पवित्र वेंकटाद्रि पहाड़ियों के प्रति वैज्ञानिकों के सम्मान को व्यक्त करता है। वेंकटाद्रि नाम संस्कृत के ‘वेंकट’ शब्द से लिया गया है, जिसका अर्थ है ‘पापों को दूर करने वाला’।
यह खोज जेडएसआई के फ्रेशवाटर बायोलाजी रीजनल सेंटर (हैदराबाद) और रेप्टिलिया अनुभाग (कोलकाता) के साथ-साथ फकीर मोहन विश्वविद्यालय (ओडिशा) की एक संयुक्त टीम का परिणाम है। इस अध्ययन के निष्कर्षों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठित पत्रिका हरपेटोजोआ के नवीनतम अंक (खंड 38, 2025) में प्रकाशित किया गया है।
आणविक और आनुवंशिक विश्लेषण के माध्यम से इस नई छिपकली प्रजाति की विशिष्टता की पुष्टि की गई है। प्रायद्वीपीय भारत में पाई जाने वाली इसकी निकट संबंधी प्रजातियों, जैसे एच. ज्ञान, एच. नीलगिरिपुंसिस और एच. प्रायद्वीपीय, से यह प्रजाति आनुवंशिक रूप से 9.7 से 12.9 प्रतिशत तक भिन्न पाई गई है। यह आनुवंशिक विचलन स्पष्ट रूप से इसे एक अलग प्रजाति के रूप में स्थापित करता है।
जेडएसआई की निदेशक धृति बनर्जी ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि आंध्र प्रदेश में हेमीफिलोडैक्टाइलस वंश की यह दूसरी प्रजाति है जिसकी पहचान की गई है। इससे पहले एच. अराकुएंसिस नामक प्रजाति की खोज हुई थी। यह नई खोज क्षेत्र की जैव विविधता के महत्व को रेखांकित करती है और वैज्ञानिकों के लिए आगे के शोध के द्वार खोलती है। शेषाचलम बायोस्फीयर रिजर्व जैसे संरक्षित क्षेत्र नई प्रजातियों की खोज के लिए महत्वपूर्ण स्थल बने हुए हैं।
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