इंडिगो संकट: सरकार सख्त, जांच रिपोर्ट के बाद होगी कड़ी कार्रवाई
इंडिगो एयरलाइंस की उड़ानों में लगातार हो रहे व्यवधानों पर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री मुरलीधर मोहोल ने रविवार को स्पष्ट किया कि सरकार इस मामले को अत्यंत गंभीरता से ले रही है और उड़ान ड्यूटी समय सीमा (एफडीटीएल) के उल्लंघन के लिए एयरलाइन के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जांच समिति की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद निश्चित रूप से आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पुणे में पत्रकारों से बात करते हुए मोहोल ने बताया कि पायलट एसोसिएशन ने लंबे समय से ड्यूटी घंटों को 10 घंटे से घटाकर 8 घंटे करने की मांग की थी, जिसके लिए एफडीटीएल नियमों में सुधार आवश्यक था। दिल्ली हाई कोर्ट ने भी इस मांग को स्वीकार करते हुए दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसके मद्देनजर, नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने देश की सभी एयरलाइन कंपनियों को सचेत किया था कि हाई कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार एफडीटीएल को दो चरणों में लागू किया जाए – पहला चरण जुलाई 2025 से और दूसरा नवंबर 2025 से।
मंत्री ने अफसोस व्यक्त करते हुए कहा कि जहां अन्य सभी एयरलाइन कंपनियों ने इन निर्देशों पर गंभीरता से काम किया, वहीं इंडिगो ने इसे उतनी गंभीरता से नहीं लिया, जितनी अपेक्षित थी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उड़ानों में पैदा हुई अराजकता का मुख्य कारण इंडिगो का इस मामले में लापरवाह रवैया ही था। मोहोल के अनुसार, इंडिगो के इस रवैये के कारण हजारों यात्रियों को मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा है। सरकार यात्रियों को हुई असुविधा के लिए जवाबदेही तय करने हेतु कदम उठा रही है।
सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस संकट के बीच, इंडिगो ने दावा किया है कि उसके 95% नेटवर्क ऑपरेशन दोबारा शुरू हो गए हैं और हालात में सुधार के संकेत हैं। वहीं, एअर इंडिया जैसी अन्य एयरलाइंस ने घरेलू विमान यात्रियों को ‘विशेष छूट’ की पेशकश कर इंडिगो संकट से प्रभावित लोगों को राहत देने का प्रयास किया है। हालांकि, सरकार का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि भविष्य में इस तरह की स्थिति की पुनरावृत्ति न हो और यात्रियों के हितों की रक्षा की जा सके।
