इंडिगो की मनमानी पर डीजीसीए की निष्क्रियता, यात्रियों को हुई भारी परेशानी
देश की प्रमुख विमानन कंपनी इंडिगो ने हाल के दिनों में यात्रियों को अभूतपूर्व परेशानी में डाला है। इसका मुख्य कारण नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) द्वारा जारी किए गए उन नए नियमों का पालन करने में कंपनी की विफलता है, जिनका उद्देश्य पायलटों को अत्यधिक थकान से बचाना था। इन नियमों का पालन न करने के कारण इंडिगो की कई उड़ानें रद्द हुईं या उनमें भारी विलंब हुआ, जिससे यात्रियों को न केवल समय का नुकसान हुआ, बल्कि आर्थिक रूप से भी उन्हें झटका लगा।
अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किए गए ये नियम सभी एयरलाइनों के लिए अनिवार्य थे और इन्हें लागू करने के लिए पर्याप्त समय भी दिया गया था। इन नियमों के पीछे मुख्य विचार यह सुनिश्चित करना था कि पायलट अपनी ड्यूटी के दौरान अत्यधिक थके हुए न हों, क्योंकि उनकी सतर्कता सीधे तौर पर विमान की सुरक्षित उड़ान से जुड़ी होती है। जहाँ एयर इंडिया, स्पाइसजेट और अकासा एयर जैसी अन्य एयरलाइनों ने इन नियमों को अपनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए, वहीं इंडिगो ने इस ओर कोई खास ध्यान नहीं दिया, यहाँ तक कि नियमों को लागू करने की समयसीमा बढ़ाए जाने के बावजूद।
सूत्रों के अनुसार, यह स्थिति डीजीसीए की निगरानी में स्पष्ट खामियों को भी दर्शाती है। डीजीसीए को यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि सभी एयरलाइंस, विशेषकर इंडिगो जैसी बड़ी एयरलाइन जो घरेलू बाजार में 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी रखती है, इन महत्वपूर्ण सुरक्षा नियमों का पालन कर रही हैं। इसके अलावा, इंडिगो ने भी डीजीसीए को पहले से सूचित नहीं किया कि वह नियमों के अनुपालन में असमर्थ है या उसे और अधिक समय की आवश्यकता है।
जब 1 दिसंबर से नए नियम लागू हुए, तो इंडिगो की परिचालन क्षमता पर इसका सीधा असर पड़ा और उड़ानों के रद्द होने व देरी का सिलसिला शुरू हो गया। इस घटना से यह स्पष्ट है कि एयरलाइन प्रबंधन की लापरवाही और नियामक संस्था की शिथिलता ने मिलकर यात्रियों के लिए एक शर्मनाक स्थिति पैदा की। यह आवश्यक है कि इंडिगो इस लापरवाही के लिए यात्रियों को उचित मुआवजा दे और डीजीसीए भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए अपनी निगरानी प्रणाली को मजबूत करे।
