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नजीबाबाद का जंगल बना बाघों का गुप्त ठिकाना, यूपी में नया वन्यजीव क्षेत्र

By Dec 2, 2025

उत्तर प्रदेश के नजीबाबाद वन क्षेत्र में पहली बार कैमरे में तीन बाघ और एक हिमालयन काला भालू कैद होने से वन्यजीव प्रेमियों में उत्साह है। 34 हजार हेक्टेयर में फैला यह घना जंगल जल्द ही उत्तर प्रदेश का एक नया, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित वन्यजीव क्षेत्र बन सकता है। यह क्षेत्र अब केवल आवाजाही का मार्ग नहीं, बल्कि बाघ, हाथी, गुलदार और काले भालू जैसे बड़े वन्यजीवों का एक स्थायी घर बनता जा रहा है।

कौड़िया रेंज में लगाए गए कैमरा ट्रैप में मिली इन तस्वीरों ने वन विशेषज्ञों को इस क्षेत्र को एक महत्वपूर्ण वन्यजीव क्षेत्र के रूप में चिह्नित करने और पहली बार बाघों की गणना कराने के लिए प्रेरित किया है। अखिल भारतीय बाघ गणना 2026 में इस जंगल को औपचारिक रूप से शामिल किया गया है, जिससे यहां की वास्तविक जैव विविधता, वन्यजीवों की संख्या और प्राकृतिक आवास की स्थिति का वैज्ञानिक आकलन संभव होगा। कैमरों से प्राप्त तस्वीरें वन विभाग को वन्यजीवों के आवागमन के मार्गों और उनकी गतिविधियों के प्रमुख क्षेत्रों को समझने में मदद करेंगी।

जंगल में चीतल, सांभर, पाड़ा, काकड़ और जंगली सूअर जैसे शाकाहारी जीवों की भी बहुतायत बताई जा रही है, जो बाघों के लिए मुख्य आहार का स्रोत हैं। बाघ गणना अभियान जनवरी से अप्रैल 2026 तक चलेगा। इसके लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून में वन अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। गणना के बाद प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा किया जाएगा और जनवरी 2027 में अंतिम रिपोर्ट जारी की जाएगी।

यह जंगल हरिद्वार के चिड़ियापुर से लेकर कालागढ़ तक लगभग 60 किलोमीटर तक फैला हुआ है और उत्तराखंड की सीमा से सटा होने के कारण कार्बेट बाघ अभयारण्य के करीब है। हालांकि, यह उत्तर प्रदेश में होने के कारण सीधे तौर पर कार्बेट का हिस्सा नहीं है, लेकिन प्राकृतिक रूप से यह उसी भू-दृश्य का एक अहम हिस्सा है। इसी कारण यहां हाथी और बाघों की आवाजाही बनी रहती है और वे यहां अपना स्थायी ठिकाना बना रहे हैं।

वन अधिकारियों के अनुसार, जंगल के भीतर कृषि फार्मों की मौजूदगी पूर्ण संरक्षित वन्यजीव क्षेत्र घोषित करने में एक तकनीकी चुनौती पेश कर सकती है, क्योंकि ऐसे मार्गों के उपयोग को नियंत्रित करना होगा। इसके बावजूद, वन्यजीवों की लगातार बढ़ती उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि यह जंगल प्राकृतिक रूप से समृद्ध हो रहा है। नजीबाबाद के साथ ही, मुरादाबाद के अमानगढ़ बाघ आरक्षित क्षेत्र में भी वन्यजीव गणना की तैयारी शुरू हो गई है, जहां 90 कैमरा ट्रैप लगाए जाने हैं। यह पूरा क्षेत्र एक विस्तृत बाघ-भू-दृश्य के रूप में स्थापित हो रहा है।

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