नहरों में पानी नहीं, किसान परेशान: सिंचाई संकट गहराया
चौमुहां क्षेत्र में किसानों की चिंताएं तब और बढ़ गई हैं जब शेरगढ़ रजवाहा और उससे जुड़ी माइनरों में सिंचाई के लिए पानी नहीं छोड़ा गया है। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि हाल ही में हुई बारिश ने रबी की बुवाई, विशेषकर गेहूं की, को पूरी तरह प्रभावित होने से तो बचा लिया, लेकिन यह बारिश पर्याप्त नहीं है।
शेरगढ़ रजवाहा और उसकी शाखाओं से जुड़े कई गांवों की कृषि भूमि की सिंचाई इन नहरों पर निर्भर है। किसानों का आरोप है कि सिंचाई विभाग की ओर से पानी छोड़ने में अत्यधिक देरी की जा रही है, जबकि नहरों, बंबाओं और माइनरों की साफ-सफाई का कार्य लगभग दो सप्ताह पहले ही पूरा कर लिया गया था। ऐसे में, जिन किसानों के पास निजी सिंचाई के साधन उपलब्ध नहीं हैं, वे समय पर अपनी फसलों को पलेवट (पहली सिंचाई) न दे पाने को लेकर बेहद चिंतित हैं।
किसानों के अनुसार, गेहूं की बुवाई के लिए नवंबर का महीना सबसे उपयुक्त होता है और यह लगभग समाप्त होने वाला है। नहरों में पानी की अनुपलब्धता के कारण गेहूं की फसल का भविष्य अनिश्चित नजर आ रहा है। कुछ किसानों ने बारिश के सहारे बुवाई तो कर दी थी, लेकिन अब पानी के अभाव में उनकी नन्ही फसलें सूखने लगी हैं।
किसानों ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। ईश्वरलाल, राजन बाबा, सुरेश सिंह, राजेंद्र लंबरदार, लाखन सिंह, राहुल सिंह, दाताराम, रामकिशन, तोताराम, गौरव सिंह सहित अन्य किसानों ने जिलाधिकारी से अपील की है कि शेरगढ़ रजवाहा और उसकी सभी माइनरों में अविलंब पानी छोड़ा जाए ताकि किसानों को राहत मिल सके और उनकी खड़ी फसलें बर्बाद न हों।
