इन्हेलर की गलतियां सांस की बीमारियों को बना रही हैं गंभीर
सांस से जुड़ी गंभीर बीमारियों जैसे अस्थमा और क्रॉनिक आब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) के उपचार में इन्हेलर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हालांकि, एक हालिया अध्ययन में यह बात सामने आई है कि अधिकांश मरीज इसके उपयोग में लापरवाही बरत रहे हैं, जिससे बीमारी का प्रभावी उपचार बाधित हो रहा है। एम्स भोपाल द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, लगभग 70 प्रतिशत मरीज इन्हेलर का गलत तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं, जो उनकी सेहत के लिए चिंता का विषय है।
यह छोटी सी लगने वाली गलती असल में बीमारी को और अधिक गंभीर बना रही है। पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञों के नेतृत्व में हुए इस अध्ययन में पाया गया कि मरीज इन्हेलर के उपयोग में दो मुख्य गलतियां कर रहे थे। पहली गलती मीटर डोज इन्हेलर (एमडीआई) यानी पंप वाले इन्हेलर के साथ स्पेसर का उपयोग न करना है। अध्ययन में शामिल 86 प्रतिशत एमडीआई उपयोगकर्ताओं ने स्पेसर का इस्तेमाल नहीं किया। स्पेसर एक प्लास्टिक का उपकरण होता है जो इन्हेलर के आगे लगाया जाता है। इसके बिना, दवा बहुत तेजी से निकलती है और फेफड़ों में गहराई तक जाने के बजाय गले में ही अटक जाती है।
दूसरी बड़ी गलती ड्राइ पाउडर इन्हेलर (डीपीआई) यानी पाउडर वाले इन्हेलर के उपयोगकर्ताओं में देखी गई। 60 प्रतिशत डीपीआई उपयोगकर्ताओं ने दवा को फेफड़ों तक पहुंचाने के लिए आवश्यक गहरी और जोरदार सांस नहीं ली। पाउडर वाली दवा को प्रभावी ढंग से फेफड़ों के भीतर तक ले जाने के लिए मरीज को तेजी से और गहराई से सांस खींचना होता है। हल्की या धीमी सांस लेने से दवा मुंह या गले में ही रह जाती है और उसका असर नहीं हो पाता।
इस अध्ययन के दौरान, दमा के 45 और सीओपीडी के 38 मरीजों पर चार हफ्तों तक यह प्रयोग किया गया। अध्ययन की खास बात यह थी कि मरीजों की दवा में कोई बदलाव नहीं किया गया, बल्कि उन्हें केवल इन्हेलर का सही उपयोग सिखाया गया। इस सरल हस्तक्षेप के आश्चर्यजनक परिणाम सामने आए। चार हफ्तों के भीतर, दमा के मरीजों के फेफड़ों की कार्यक्षमता (एफईवी-वन) में सुधार देखा गया और उनकी परेशानी कम हुई। उनके एसीटी (अस्थमा कंट्रोल टेस्ट) स्कोर में 18.0 से बढ़कर 20.75 हो गया। इसी तरह, सीओपीडी के मरीजों में भी बीमारी के लक्षण कम हुए, जैसा कि सीएटी (सीओपीडी असेसमेंट टेस्ट) स्कोर के 21.86 से घटकर 19.83 होने से स्पष्ट है। वे पहले की तुलना में काफी बेहतर महसूस करने लगे।
यह अध्ययन इस बात पर जोर देता है कि इन्हेलर जैसी दवाओं का सही उपयोग कितना महत्वपूर्ण है। मरीजों को इन उपकरणों का सही तरीका सिखाना न केवल उनकी स्थिति को सुधार सकता है, बल्कि गंभीर जटिलताओं को भी रोक सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि इन्हेलर का उपयोग करने वाले मरीजों को अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से इसके सही इस्तेमाल के बारे में अवश्य जानकारी लेनी चाहिए।
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