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नैनी झील की सुरक्षा दीवारों का होगा जीर्णोद्धार, 44.35 करोड़ की लागत से होगा सर्वे

By Dec 1, 2025

नैनीताल की प्रसिद्ध नैनी झील की सुरक्षा दीवारों को नवजीवन देने की कवायद शुरू हो गई है। आगामी मरम्मत कार्य से पूर्व, झील के परिधि क्षेत्र का विस्तृत जियोफिजिकल सर्वे कराया जाएगा। इस महत्वपूर्ण अध्ययन का उद्देश्य वर्तमान सुरक्षा दीवारों के क्षरण और टूटने के मूल कारणों का पता लगाना है, साथ ही भूगर्भीय हलचल की भी गहन जांच की जाएगी। प्राप्त जांच रिपोर्ट को प्रतिष्ठित आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों को भेजा जाएगा, जिनके सुझावों और विश्लेषण के आधार पर ही मरम्मत का अंतिम तरीका और योजना तय की जाएगी।

सिंचाई विभाग ने इस सर्वे के लिए आवश्यक उपकरण और मशीनरी एक निजी संस्था से मंगवा ली है और सर्वे का कार्य आरंभ कर दिया गया है। विभाग द्वारा सुरक्षा दीवारों के निर्माण के लिए 44.35 करोड़ रुपये की एक प्रारंभिक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) भी तैयार कर ली गई है। हालांकि, यह डीपीआर आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों द्वारा दिए जाने वाले सुझावों के बाद संशोधित हो सकती है, जिससे कार्य की गुणवत्ता और प्रभावशीलता सुनिश्चित की जा सके।

यह उल्लेखनीय है कि झील से जुड़ी सुरक्षा दीवारों का निर्माण ब्रिटिशकाल में किया गया था। समय के साथ, मालरोड का मोटर रोड में परिवर्तित होना और वाहनों के बढ़ते दबाव के कारण, झील की सुरक्षा दीवारों पर अत्यधिक बोझ पड़ा। पर्याप्त रखरखाव और पुनर्निर्माण के अभाव में, झील के जलस्तर में निरंतर उतार-चढ़ाव और अनदेखी के चलते, चारों ओर की सुरक्षा दीवारें जीर्ण-शीर्ण हो गईं। इसके परिणामस्वरूप, वर्ष 2018 और वर्तमान वर्ष में सुरक्षा दीवारों के साथ-साथ मालरोड का भी हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था।

बीते 18 सितंबर को, क्षतिग्रस्त मालरोड का निरीक्षण करने पहुंचे कुमाऊँ आयुक्त दीपक रावत ने सिंचाई विभाग को झील की सुरक्षा दीवारों की मरम्मत के लिए एक विस्तृत परियोजना तैयार करने के निर्देश दिए थे। सूत्रों के अनुसार, सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता डीके सिंह ने बताया कि चारों ओर की सुरक्षा दीवारों के निर्माण के लिए 44.35 करोड़ रुपये की डीपीआर तैयार कर मुख्य अभियंता कार्यालय भेजी गई है।

अधिशासी अभियंता डीके सिंह ने आगे बताया कि विभागीय स्तर पर डीपीआर तो तैयार कर ली गई है, लेकिन झील की 3.4 किलोमीटर की परिधि में किन स्थानों पर किस प्रकार के उपचार की आवश्यकता है, इस पर विशेषज्ञों की राय लेना आवश्यक है। इसीलिए जियोफिजिकल सर्वे कराया जा रहा है। इस सर्वे के अंतर्गत, लगभग 12 मीटर की गहराई तक छेद करके मिट्टी और साइल के नमूने एकत्र किए जाएंगे। इन नमूनों का परीक्षण आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों द्वारा किया जाएगा, जिससे झील के परिधि क्षेत्र में हो रहे भूस्खलन के कारणों का भी पता चल सकेगा।

प्रारंभिक डीपीआर में झील की परिधि की सुरक्षा के लिए पाइलिंग और सुरक्षा दीवार निर्माण जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। जिन स्थानों पर झील सीधे सड़क के नीचे स्थित है, वहां पाइलिंग का प्रस्ताव है, जबकि अन्य स्थानों पर तल पर आरसीसी के बाद सामान्य दीवार निर्माण की योजना है। हालांकि, अंतिम निर्णय जियोफिजिकल सर्वे से प्राप्त आंकड़ों और विशेषज्ञों द्वारा डीपीआर में किए जाने वाले संशोधनों के आधार पर ही लिया जाएगा।

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