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नए श्रम कानूनों से गिग वर्कर्स को मिलेगा सामाजिक सुरक्षा का कवच

By Nov 22, 2025

मोदी सरकार ने देश में नए श्रम कानूनों का युग शुरू करते हुए चार नए श्रम संहिताओं को अधिसूचित कर दिया है। इन संहिताओं के लागू होने से अब तक के 29 पुराने श्रम कानूनों को चार नए कानूनों में बदला जाएगा। इसका सबसे बड़ा असर गिग इकॉनॉमी पर पड़ेगा, क्योंकि पहली बार गिग वर्कर, प्लेटफॉर्म वर्कर और ‘एग्रीगेटर’ की कानूनी परिभाषा दी गई है। भारत में अमेज़न, फ्लिपकार्ट और जोमैटो जैसे प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले गिग वर्कर्स की बड़ी संख्या को देखते हुए, इन कंपनियों के प्रबंधन ने नए श्रम कानूनों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

जोमैटो और ब्लिंकिट की पैरेंट कंपनी इटर्नल लिमिटेड ने नए श्रम संहिताओं का स्वागत करते हुए कहा है कि ये बदलाव गिग वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करेंगे। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि वे कई वर्षों से सरकार के साथ इस प्रक्रिया में जुड़े रहे हैं और लगातार अपना इनपुट देते रहे हैं। उन्हें विश्वास है कि इन नियमों से होने वाला वित्तीय प्रभाव उनके व्यवसाय की दीर्घकालिक सेहत और स्थिरता पर नकारात्मक असर नहीं डालेगा। कंपनी ने यह भी कहा कि वे काफी समय से इन सामाजिक सुरक्षा योगदानों की तैयारी कर रहे थे।

अमेज़न इंडिया के प्रवक्ता ने कहा कि वे सरकार के श्रम सुधारों के इरादे का स्वागत करते हैं और इन बदलावों का मूल्यांकन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि सामाजिक सुरक्षा संहिता (CoSS) उनकी मौजूदा प्राथमिकताओं, जैसे कर्मचारियों की सुरक्षा, कल्याण और सुविधा, के साथ पूरी तरह से संरेखित है।

नए नियमों के तहत, एग्रीगेटर कंपनियों को अपने सालाना टर्नओवर का 1-2% (अधिकतम 5% तक सीमित) गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के कल्याण कोष में देना होगा। सभी गिग वर्कर्स को आधार से लिंक एक यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) मिलेगा, जिससे राज्य बदलने पर भी उनका सामाजिक सुरक्षा लाभ बना रहेगा। फूड डिलीवरी, राइड-शेयरिंग, ई-कॉमर्स डिलीवरी, लॉजिस्टिक्स आदि सभी क्षेत्रों के प्लेटफॉर्म वर्कर्स को इसका लाभ मिलेगा।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, एग्रीगेटर कंपनियों की परिचालन लागत बढ़ेगी, लेकिन इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार भविष्य में कौन-सी योजनाएं बनाती है। इसमें टर्नओवर की गणना, योगदान की आवृत्ति और श्रमिकों को लाभ कैसे मिलेगा, जैसे महत्वपूर्ण पहलू शामिल हैं। सरकार ने पहले ही विभिन्न एग्रीगेटरों के साथ इस योजना पर चर्चा कर ली है।

यह सुधार भारत के श्रम बाजार को अधिक लचीला, सरल और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जो गिग वर्कर्स के लिए बेहतर भविष्य की राह खोलेगा।

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