0

नई शिक्षा नीति: भारतीय शिक्षा बोर्ड ला रहा व्यवहारिक और ज्ञान आधारित पाठ्यक्रम

By Nov 28, 2025

नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप, भारतीय शिक्षा बोर्ड (BSB) एक ऐसी शिक्षा संरचना विकसित कर रहा है जो छात्रों को केवल परीक्षा आधारित शिक्षा तक सीमित न रखकर उन्हें व्यवहारिक, कौशलयुक्त और भारतीय परंपराओं पर आधारित शिक्षा प्रदान करेगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य देश से मैकाले शिक्षा पद्धति को हटाकर विद्यालयों में भारतीय दर्शन, इतिहास, गणित जैसे विषयों को शामिल करना है।

सर्किट हाउस पहुंचे भारतीय शिक्षा बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष डा. एनपी सिंह ने इस संबंध में जानकारी साझा करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मैकाले शिक्षा पद्धति में बदलाव लाने के आह्वान के बाद से इस व्यवस्था पर बहस तेज हो गई है। भारतीय शिक्षा बोर्ड ने इस दिशा में प्रयास शुरू कर दिए हैं। सीबीएसई के समानांतर एक बोर्ड के रूप में, भारतीय शिक्षा बोर्ड पूरे देश के विद्यालयों में अपनी शिक्षा व्यवस्था लागू करने की दिशा में कार्य कर रहा है।

भारतीय शिक्षा बोर्ड का प्रमुख उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक शिक्षा, जीवन मूल्यों और आधुनिक कौशल पर आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना है। डा. सिंह ने स्पष्ट किया कि भारतीय शिक्षा बोर्ड का गठन भारत सरकार की ओर से किया गया है, जिसमें पतंजलि योगपीठ प्रायोजक की भूमिका निभा रहा है। उन्होंने बताया कि बोर्ड के गठन की प्रक्रिया वर्ष 2014 में ही प्रारंभ हो गई थी, जब स्वामी रामदेव के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री से मिलकर मैकाले की शिक्षा पद्धति को समाप्त कर भारतीय शिक्षा पद्धति लागू करने की अनुशंसा की थी।

इसके बाद, वर्ष 2019 में तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रकाश जावड़ेकर की अध्यक्षता में बोर्ड गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। कार्यकारी अध्यक्ष ने लॉर्ड मैकाले की शिक्षा व्यवस्था के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसका मकसद भारतीय बालमन को अपनी जड़ों और श्रेष्ठ परंपराओं से दूर करना था। इस पद्धति ने भारतीय संस्कृति की विकृत छवि प्रस्तुत की और शिक्षा के नाम पर युवाओं को केवल नौकरी के लिए तैयार करने की प्रवृत्ति विकसित की।

इसी संदर्भ में, तीन अगस्त 2022 को भारतीय शिक्षा बोर्ड को अन्य समानांतर शिक्षा बोर्डों के समकक्ष घोषित किया गया। इसकी मुख्य संस्था में एनसीईआरटी के निदेशक, सीबीएसई के चेयरमैन, पांच केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपति सहित कुल 18 सदस्य शामिल हैं। भारतीय शिक्षा बोर्ड के तहत कक्षा एक से आठ तक की पुस्तकें तैयार हो चुकी हैं, जबकि कक्षा नौ से 12 की पुस्तकों का कार्य इसी वर्ष पूर्ण किया जा रहा है। वर्तमान में देशभर के करीब 780 विद्यालय इस बोर्ड से जुड़ चुके हैं, जिनमें बरेली के फरीदपुर स्थित आरआर पब्लिक स्कूल भी शामिल है।

डा. एनपी सिंह ने बताया कि किताबों को भारतीय व्यवस्था के अनुसार प्रस्तुत किया गया है, जिसमें इतिहास में अतिवाद से बचा जा रहा है और किसी भी कालखंड को हटाया नहीं जाएगा। गणित में आर्यभट्ट, वाराहमिहिर जैसे महान गणितज्ञों को शामिल किया गया है, तथा भारत की क्षेत्रीय भाषाओं का साहित्य भी पाठ्यक्रम का हिस्सा होगा। इस व्यवस्था को समृद्ध करने के लिए देशभर से दो हजार प्रोफेसर और चार हजार पीजीटी शिक्षकों को जोड़ा जा रहा है।

भारतीय शिक्षा बोर्ड बस्ते का बोझ कम करने पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिसमें केवल आवश्यक पाठ्य पुस्तकों को ही पाठ्यक्रम में शामिल किया जा रहा है। विषयों को बोझिल बनाने के बजाय रुचिकर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जैसे खेल-खेल में विज्ञान सिखाना और पंचतंत्र की तरह गणित पढ़ाना। विज्ञान बुक डेवलपमेंट कमेटी का चेयरमैन एससी वर्मा को बनाया गया है। इस दिशा में तीन वर्षों में 142 बैठकें हो चुकी हैं और सभी प्रदेशों व जिलों में समन्वयक नियुक्त किए जा रहे हैं।

About Amit Sagar

Journalist covering latest updates.

साझा करें