होटल मैनेजर अर्णव दुग्गल की रहस्यमयी मौत: क्या दिल्ली पुलिस ने छिपाया सच? CBI करेगी अब जांच!
दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए 23 वर्षीय होटल मैनेजर अर्णव दुग्गल की वर्ष 2017 में हुई रहस्यमयी मौत की जांच सीबीआई को सौंपने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल उठाते हुए, उसकी कार्यप्रणाली में ‘गंभीर कमियों’ और ‘संदिग्ध आचरण’ पर कड़ी टिप्पणी की है। यह फैसला अर्णव की मां अनु दुग्गल की याचिका पर आया है, जिन्होंने लगातार यह आरोप लगाया था कि उनके बेटे ने आत्महत्या नहीं की थी, बल्कि यह एक सुनियोजित हत्या हो सकती है।
न्यायमूर्ति तुषार राव गेड़ेला ने सीबीआई को न केवल इस मामले की नए सिरे से जांच करने, बल्कि दिल्ली पुलिस द्वारा की गई सभी चूकों की जिम्मेदारी तय करने पर भी रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि विज्ञान और फोरेंसिक तकनीक में हुई प्रगति ने दुनिया भर में दशकों पुराने मामलों को सुलझाया है, इसलिए सच की खोज करने में कभी देर नहीं होती। उन्होंने अमेरिका के गोल्डन स्टेट किलर और ग्रीन रिवर किलर जैसे कुख्यात मामलों का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे फोरेंसिक डीएनए की मदद से 40 वर्ष पुराने अपराध भी सुलझाए गए।
अर्णव, आईटीसी ग्रैंड भारत में मैनेजर के पद पर कार्यरत थे और जून 2017 में मेधा तिवारी के घर पर संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाए गए थे। दिल्ली पुलिस ने शुरुआत से ही इसे आत्महत्या का मामला बताया था, लेकिन परिवार का कहना था कि कमरे को सुसाइड सीन जैसा दिखाने के लिए तैयार किया गया था। परिवार ने हमेशा इस बात पर जोर दिया कि अर्णव आत्महत्या नहीं कर सकते थे।
दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस की जांच पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि न सिर्फ जांच अधिकारी, बल्कि क्राइम ब्रांच और एसआईटी ने भी एक ही रट लगाकर आत्महत्या के सिद्धांत को आगे बढ़ाया। कोर्ट ने पाया कि पुलिस ने किसी भी वैज्ञानिक, विश्लेषणात्मक या स्वतंत्र विचार से जांच नहीं की, जिससे मामले की सच्चाई तक पहुंचा जा सके।
कोर्ट ने जांच में कई गंभीर खामियां उजागर कीं, जिनमें अर्णव की महिला मित्र का मोबाइल फोन तुरंत जब्त न करना प्रमुख था। कोर्ट ने कहा कि कॉल रिकॉर्ड और संदेशों का डिलीट होना एक गंभीर पहलू था, जिस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। पुलिस यह स्पष्ट नहीं कर पाई कि फोन जब्त न करने का कारण क्या था, जिससे जांच की ईमानदारी पर सवाल उठते हैं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण एंटीमार्टम हैंगिंग से हुई एस्फिक्सिया बताया गया था, लेकिन हाई कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई कि पुलिस ने यह जानने की कोशिश ही नहीं की कि आखिर अर्णव आत्महत्या क्यों करता। कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे यह पता चले कि अर्णव अवसाद में था या उसके भीतर आत्मघाती प्रवृत्तियां थीं, जिससे उनकी आत्महत्या की थ्योरी और कमजोर पड़ जाती है।
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