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MP NEET फर्जीवाड़ा: आधार केंद्रों से मेडिकल कॉलेज तक फैला जाल, मूल निवासियों के हक पर डाका

By Dec 5, 2025

मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के माध्यम से मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश दिलाने वाले एक बड़े फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ है। सूत्रों के अनुसार, यह गिरोह आधार कार्ड और लोकसेवा केंद्रों तक अपनी पैठ बनाए हुए था, जिसके सहारे यह दूसरे राज्यों के अभ्यर्थियों को मध्य प्रदेश के मूल निवासियों के कोटे से प्रवेश दिलाने में सफल हो रहा था। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने प्रदेश के मूल निवासी अभ्यर्थियों को मिलने वाले आरक्षण का लाभ उठाने के लिए पहले आधार केंद्रों पर अपने आधार कार्ड में हेरफेर कर पता बदलवाया।

इसके बाद, इसी बदले हुए पते के आधार पर लोकसेवा केंद्रों से मूल निवासी प्रमाण पत्र जारी करवाए गए। हैरान करने वाली बात यह है कि नियमानुसार मूल निवासी प्रमाण पत्र के लिए समग्र आईडी अनिवार्य होती है, लेकिन इस मामले में बिना समग्र आईडी के भी प्रमाण पत्र जारी किए गए। इससे यह सवाल खड़ा होता है कि आखिर कैसे अधूरे दस्तावेजों पर ऐसे महत्वपूर्ण प्रमाण पत्र जारी किए गए और दूसरे राज्यों के अभ्यर्थी लाखों रुपये खर्च कर प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पाने में कामयाब हो रहे थे।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, गिरोह ने रीवा मेडिकल कॉलेज में कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से ईडब्ल्यूएस, दिव्यांग और स्वतंत्रता सेनानी जैसे कई फर्जी प्रमाण पत्र भी तैयार करवाए। इन प्रमाण पत्रों का कोई वास्तविक सत्यापन नहीं हुआ। भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेने वाले बिहार के हिमांशु कुमार और मुंबई की क्रिस्टल डिकोस्टा के फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र भी रीवा में ही बनाए गए थे, जिनमें दोनों के लिए एक जैसी चिकित्सीय समस्या दर्शाई गई थी।

गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि उन्होंने केवल आधार कार्ड में पता अपडेट कराया था, अन्य विवरण नहीं बदले थे। हालांकि, जब कोहेफिजा पुलिस दिल्ली के मुख्य आधार केंद्र पहुंची तो वहां के अधिकारियों ने हाईकोर्ट के आदेश के बिना जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया। इस फर्जीवाड़े के मुख्य संचालकों में रीतेश यादव, संदीप कुमार और सुमित कुमार आदित्य के नाम सामने आए हैं। सुमित, जो कि रीवा मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर बताया जा रहा है, पर यह भी शक है कि उसने स्वयं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रवेश लिया हो। ये तीनों आरोपी अभी भी फरार हैं, और इनके पकड़े जाने के बाद ही इस पूरे गिरोह के नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद है। यह पूरा मामला प्रदेश के मूल निवासी छात्रों के हक पर सीधा डाका डाल रहा है।

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