MGM अस्पताल में निरीक्षण के दौरान खुली अव्यवस्था की पोल, मरीज परेशान
जमशेदपुर के प्रतिष्ठित एमजीएम अस्पताल में एक औचक निरीक्षण के दौरान व्यवस्था की पोल खुल गई। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनईएम) के निदेशक संतोष गर्ग के दौरे में अस्पताल की कई गंभीर खामियां सामने आईं, जिससे मरीजों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। निरीक्षण में पाया गया कि ओपीडी में डॉक्टरों के नाम प्रदर्शित नहीं थे, टोकन सिस्टम बंद पड़ा था, अधिकांश शौचालय अनुपयोगी थे, वाटर कूलर खराब थे और लिफ्टों में मरीजों के फंसने की घटनाएं बढ़ रही थीं।nnनिरीक्षण के दौरान जब निदेशक ओपीडी पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि डॉक्टरों के नाम और उनकी विशेषज्ञता बताने वाले बोर्ड खाली थे। इससे मरीजों को यह समझने में कठिनाई हो रही थी कि उन्हें किस डॉक्टर से मिलना है। यह स्थिति खासकर उन नए मरीजों के लिए परेशानी का सबब बन रही थी जो अस्पताल की व्यवस्था से परिचित नहीं थे।nnअस्पताल की स्वच्छता व्यवस्था की स्थिति भी चिंताजनक पाई गई। निरीक्षण में यह बात सामने आई कि अस्पताल के लगभग 80% शौचालय या तो बंद थे या उपयोग के लायक नहीं थे। मेडिसिन विभाग में विशेष रूप से स्थिति खराब थी, जहाँ 16 में से 11 शौचालय बंद मिले। इस बारे में उपाधीक्षक ने भी गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि कर्मचारियों की संख्या के अनुपात में शौचालयों की कमी नहीं है, बल्कि उन पर अवैध कब्जा है। उन्होंने कहा कि इस तरह की लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।nnइसके अतिरिक्त, अस्पताल के विभिन्न तलों पर लगे लगभग 44 वाटर कूलर भी खराब पाए गए। ये कूलर मरीजों और उनके तीमारदारों को पीने के लिए सामान्य, गर्म और ठंडा पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगाए गए थे, लेकिन अब इनसे किसी भी तरह का पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।nnड्यूटी पर तैनात होमगार्ड जवानों ने निदेशक को अवगत कराया कि अस्पताल की लिफ्टों में मरीजों के फंसने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि लिफ्ट ऑपरेटर की अनुपस्थिति के कारण मरीज स्वयं ही लिफ्ट का संचालन करने के लिए मजबूर हैं, जो बेहद खतरनाक है।nnनिरीक्षण में केवल ईएनटी विभाग ही ऐसा मिला जहाँ टोकन सिस्टम सुचारू रूप से काम कर रहा था। अन्य सभी विभागों में यह प्रणाली पूरी तरह से ठप पाई गई। यदि टोकन सिस्टम सक्रिय होता, तो इससे भीड़ प्रबंधन में काफी मदद मिलती और मरीजों को भी राहत मिलती।nnइस अव्यवस्था पर एनईपी डायरेक्टर संतोष गर्ग ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अस्पताल की यह स्थिति किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने बताया कि सभी विभागों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है और इसके बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने मरीजों की सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आश्वासन भी दिया।”
nnआश्वासन दिया।”
nnऔर अस्पताल में व्यवस्था सुधारने के लिए तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए।
