मुरादनगर मेन मार्केट का ‘काला सच’: गंदगी, जाम और जर्जर तारों से परेशान व्यापारी
मुरादनगर का रावली रोड मेन मार्केट, जो शहर के मुख्य बाजारों में से एक है, इन दिनों गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। व्यापारियों और स्थानीय निवासियों को गंदगी, जर्जर बिजली के तारों, ट्रैफिक जाम, आवारा पशुओं और बुनियादी सुविधाओं के अभाव का सामना करना पड़ रहा है। इन समस्याओं ने बाजार के व्यापारियों और ग्राहकों दोनों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।
बाजार में सफाई व्यवस्था की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। सफाई कर्मचारी नियमित रूप से काम नहीं करते, और जब वे आते भी हैं, तो केवल कुछ विशेष क्षेत्रों में ही सफाई करके लौट जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप, सड़कों के किनारे कूड़े के ढेर लगे रहते हैं और नालियां जाम हो जाती हैं। इससे न केवल दुर्गंध फैलती है, बल्कि मच्छरों और अन्य कीटाणुओं के पनपने का खतरा भी बढ़ जाता है।
बिजली के तारों की स्थिति भी बेहद खतरनाक है। बिजली के खंभों पर लगे तार जर्जर हालत में हैं और खतरनाक तरीके से झूल रहे हैं। बड़ी गाड़ियाँ या ऊंचे वाहन गुजरते समय इन तारों से टकराने का भय बना रहता है, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। बिजली निगम के कर्मचारी नियमित रूप से बिल तो वसूल रहे हैं, लेकिन इन लटकते तारों को ठीक करने की दिशा में कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
बाजार में पार्किंग की सुविधा का भी घोर अभाव है। इसके कारण लोग सड़कों पर ही गाड़ियां खड़ी कर देते हैं, जिससे ट्रैफिक जाम की समस्या और बढ़ जाती है। कुछ लोगों ने सड़क पर अवैध रूप से जनरेटर और अन्य उपकरण रखकर भी कब्जा कर लिया है, जो ट्रैफिक प्रवाह में बाधा डालते हैं। सुबह और शाम के व्यस्त समय में, विशेषकर त्योहारों और खास मौकों पर, गाड़ियों की लंबी कतारें लग जाती हैं, जिससे आवागमन बुरी तरह प्रभावित होता है।
पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा का भी अभाव है। बाजार आने वाले लोगों को प्यास लगने पर पानी खरीदना पड़ता है। व्यापारियों ने लंबे समय से वाटर कूलर और सार्वजनिक शौचालय बनवाने की मांग की है, लेकिन उनकी मांगें अनसुनी की जा रही हैं। बारिश के मौसम में स्थिति और भी विकट हो जाती है। नए निर्माण और ऊंचे नालों के कारण सड़कें नीची हो गई हैं, जिससे बारिश का पानी आसानी से भर जाता है और बाजार तालाब में तब्दील हो जाता है।
बाजार में आवारा पशुओं का आतंक भी कम नहीं है। ये पशु दुकानों के सामने खड़े होकर रास्ता रोकते हैं, जिससे ग्राहकों को दुकानों तक पहुंचने में असुविधा होती है। कई बार ये पशु आक्रामक होकर लोगों और ग्राहकों पर हमला भी कर चुके हैं। शिकायतें की गईं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।
इसके अतिरिक्त, शाम के समय कुछ असामाजिक तत्व बाइकों पर ग्रुप बनाकर बाजार में घूमते हैं और शोर मचाते हैं। यदि व्यापारी इनका विरोध करते हैं, तो वे मारपीट पर उतारू हो जाते हैं।
बाजार की ट्रेड एसोसिएशन ने कई बार विभिन्न मंचों पर इन समस्याओं के समाधान की गुहार लगाई है। अधिकारियों से मुलाकातें हुईं, वादे भी किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। व्यापारियों में इस उपेक्षा को लेकर गहरा रोष है और वे जल्द से जल्द इन समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे हैं।
