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मतदाता सूची पुनरीक्षण: सरकारी फॉर्म बना ‘रूठे’ परिवारों के मिलन का सेतु

By Nov 30, 2025

मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (SIR) का कार्य इन दिनों भावनात्मक सेतु का काम कर रहा है। प्रेम विवाह कर सालों पहले अपना घर छोड़ चुकी कई युवतियों को अपनी मतदाता पहचान पत्र (EPIC ID) के लिए अपने स्वजनों से संपर्क साधना पड़ा है। सरकारी प्रक्रिया के तहत भरे जा रहे फॉर्म ने जहां रिश्तों में आई दूरियों को मिटाया है, वहीं बिछड़े परिजनों के बीच भावुक मिलन का अवसर भी प्रदान किया है।

सदर तहसील क्षेत्र के गांव नवादा की एक युवती चार साल पहले अपने प्रेमी के साथ चली गई थी। परिजनों द्वारा काफी तलाशने और प्राथमिकी दर्ज कराने के बावजूद, बालिग होने के कारण युवती ने अपने प्रेमी के साथ रहने का फैसला किया था। इस घटना के बाद दोनों परिवारों के बीच बातचीत पूरी तरह बंद हो गई थी और युवती का अपने परिजनों से संपर्क भी टूट गया था।

हाल ही में, जब पूरे प्रदेश में मतदाता सूची का पुनरीक्षण शुरू हुआ, तब उस युवती को अपने अपनों की याद आई। उसने अपने घर फोन कर 2003 की मतदाता सूची में दर्ज अपनी जानकारी मांगी, ताकि वह अपने EPIC ID के लिए आवश्यक विवरण भर सके। यह मामला एक उदाहरण मात्र है, ऐसे कई मामले SIR प्रक्रिया के दौरान सामने आए हैं।

इसी तरह, जिले की अन्य तहसील क्षेत्रों और खासकर मुस्लिम बहुल इलाकों में प्रेम विवाह कर आई युवतियां भी अपने मूल निवास स्थान के परिजनों से संपर्क कर रही हैं। वे 2003 की मतदाता सूची में अपना क्रमांक, भाग संख्या आदि जानकारी प्राप्त कर रही हैं। कुछ युवतियां जो दूसरे जिलों या राज्यों से यहां आकर बस गई हैं, वे भी अपने दूर बसे परिजनों से संपर्क साध रही हैं।

अधिकारियों का कहना है कि इसके लिए परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। मतदाता सूची ऑनलाइन उपलब्ध है और चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जाकर आसानी से क्रमांक संख्या आदि देखी जा सकती है।

बुलंदशहर की रहने वाली सुलेखा करीब दस साल पहले बिसौली क्षेत्र के संग्रामपुर के नवाब हसन के साथ आई थी। उसने यहां मुस्लिम रीति-रिवाज से शादी कर ली और सुलेखा से रिहाना बन गई। उनके दो बच्चे भी हैं। इस दौरान उसकी कभी अपने परिजनों से बात नहीं हुई थी। पिछले विधानसभा चुनाव में उसने मतदान भी किया था। इस बार जब SIR प्रक्रिया शुरू हुई और गणना प्रपत्र में उसे अपने मायके की मतदाता सूची में शामिल नाम और क्रमांक संख्या भरने को कहा गया, तो उसे अपने मायके के गांव या बूथ नंबर की जानकारी नहीं थी।

उसने अपने परिजनों से संपर्क किया। दस साल बाद अपनी बेटी की आवाज सुनकर मां की रुंधे गले से हालचाल पूछा। बेटी ने अपनी मजबूरी बताई, जिसके बाद मां ने उसे आवश्यक जानकारी दी। इस तरह, सरकारी प्रक्रिया ने सालों से बिछड़ी माँ-बेटी को भावुक पल दिए।

ब्लॉक आसफपुर क्षेत्र की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत लक्ष्मीपुर में भी मतदाता पड़ताल के दौरान प्रेम प्रसंग के आधार पर हुई शादियों के कई मामले सामने आए। यहां के कई युवकों ने दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, बंगाल, बिहार और ओडिशा से विभिन्न समुदायों की युवतियों से प्रेम विवाह किया था, जिनमें से कईयों के नाम बदलकर वोट बनवाए गए थे। SIR प्रक्रिया ने इन रिश्तों को फिर से जोड़ने का काम किया है।

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