सबलपुर का शहीद स्मारक: 1857 के स्वतंत्रता सेनानियों की शहादत का गवाह
1857 के स्वतंत्रता संग्राम की आग जब कानपुर देहात तक पहुंची, तो मंगलपुर क्षेत्र का सबलपुर गांव क्रांतिकारियों का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया। इस दौरान, अंग्रेजी सेना ने यहां के 13 वीर सपूतों को पकड़कर गांव के बाहर एक नीम के पेड़ पर फांसी दे दी थी। उनकी शहादत की याद में बना शहीद स्मारक आज भी स्वतंत्रता के दीवानों की कुर्बानी की गवाही देता है।
अंग्रेजों के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध लड़ते हुए इन क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश सेना को कड़ी चुनौती दी थी। कर्नल कैंपबेल के नेतृत्व में अंग्रेजी फौज ने गांव पर धावा बोलकर उमराव सिंह, देवचंद्र, रत्ना राजपूत, भानू राजपूत, परमू राजपूत, केशव चंद्र, धर्मा, रमन राठौर, चंदन राजपूत, बल्देव राजपूत, खुमान सिंह, करन सिंह और झींझक के बाबू उर्फ खिलाड़ी नट को पकड़ लिया था। इन वीरों को गांव के किनारे नीम के पेड़ पर फांसी दी गई थी।
हालांकि, वह नीम का पेड़ अब गिर चुका है, लेकिन वहां बना चबूतरा और शहीद स्मारक आज भी इन क्रांतिकारियों की शहादत को जीवंत रखे हुए है। यह स्थल राष्ट्रीय पर्वों पर ही याद किया जाता है, और इसके उपेक्षित होने पर चिंता जताई जाती है। 2003 में तत्कालीन विधायक ने क्रांतिकारियों के नाम का पत्थर लगवाकर इसे विकसित करने की पहल की थी, लेकिन यह प्रयास आगे नहीं बढ़ सका। यह स्मारक उन अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों की याद दिलाता है जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
