अमरोहा के पतेई खादर गांव में काला पीलिया का कहर, 70 से अधिक संक्रमित, 20 की मौत
अमरोहा जिले के गंगेश्वरी विकास खंड के अंतर्गत आने वाले पतेई खादर गांव में काला पीलिया (हेपेटाइटिस सी) का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे ग्रामीणों में भय और चिंता का माहौल है। वर्तमान में 70 से अधिक ग्रामीण इस गंभीर बीमारी से संक्रमित हैं और कई लोग बेहतर इलाज के लिए मेरठ, मुरादाबाद और अन्य शहरों के अस्पतालों में अपना उपचार करा रहे हैं।
चिंताजनक बात यह है कि पिछले पांच वर्षों के दौरान इस बीमारी से जुड़ी जटिलताओं के कारण गांव में 20 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। गांव के निवासी इस प्रकोप के लिए मुख्य रूप से प्रदूषित पेयजल को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। बगद नदी के किनारे बसे इस गांव के लोगों का मानना है कि नदी का दूषित पानी ही बीमारी फैलने की जड़ है।
ग्रामीणों के अनुसार, उन्हें भूख कम लगना, खाना खाने के बाद सीने में जलन, उल्टी आना, खाना ठीक से न पचना, शरीर का रंग काला पड़ना और अत्यधिक थकान जैसे लक्षण महसूस हो रहे हैं। नरेंद्र कुमार त्यागी, एक ग्रामीण, ने बताया कि दो महीने पहले दिल्ली की एक पैथोलोजी लैब में जांच कराने पर उन्हें काला पीलिया होने का पता चला और वर्तमान में उनका इलाज चल रहा है। एक अन्य ग्रामीण, बिकलिस खातून, ने भी इसी तरह के लक्षणों का वर्णन किया और बताया कि छह महीने पहले दिल्ली लैब से कराई गई जांच में उन्हें काला पीलिया पाया गया था। उनका इलाज अमरोहा सरकारी अस्पताल में तीन महीने तक चला, लेकिन चौथी बार कराई गई जांच की रिपोर्ट अभी आनी बाकी है। एक अन्य ग्रामीण ने बताया कि कई महीनों से भूख न लगने, सीने में जलन और कमजोरी महसूस होने पर दिल्ली से खून की जांच मंगाई, जिसमें हेपेटाइटिस सी (काला पीलिया) की पुष्टि हुई। उन्होंने सरकारी अस्पताल में इलाज की गुहार लगाई है, लेकिन अभी तक उनका इलाज शुरू नहीं हो पाया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है और विशेषज्ञों से संपर्क कर रहा है ताकि बीमारी के फैलने के कारणों का पता लगाया जा सके और प्रभावी रोकथाम के उपाय किए जा सकें। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन से अपील की है कि इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान दिया जाए, बीमारी के सही कारणों का पता लगाया जाए और पीड़ितों के लिए उचित और अविलंब चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
