अमरीश पुरी के पोते वर्धन का संघर्ष: 13 साल से पहचान की तलाश
हिंदी सिनेमा के इतिहास में अमरीश पुरी का नाम खलनायक के रूप में हमेशा स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। ‘मोगेंबो’, ‘डौन्ग’ जैसे किरदारों से उन्होंने दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी। आज भले ही वह हमारे बीच नहीं हैं, पर उनकी विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश उनके पोते वर्धन पुरी कर रहे हैं।
अमरीश पुरी ने 1957 में उर्मिला दिवेकर से विवाह किया था, जिनसे उन्हें दो संतानें हुईं – राजीव और नम्रता। जहां नम्रता एक जानी-मानी कॉस्ट्यूम डिजाइनर हैं, वहीं राजीव पुरी एक बिजनेसमैन और प्रोड्यूसर हैं। जहां अमरीश पुरी के बच्चों ने फिल्मी दुनिया से दूरी बनाए रखी, वहीं उनके पोते, खासकर वर्धन पुरी, अभिनय की दुनिया में अपने दादा के नक्शेकदम पर चलने का सपना संजोए हुए हैं।
वर्धन पुरी, राजीव पुरी के बेटे हैं, जिन्होंने अपना करियर सहायक निर्देशक के तौर पर शुरू किया था। उन्होंने 2012 में आई ‘इश्कजादे’ फिल्म में अर्जुन कपूर और परिणीति चोपड़ा के साथ काम किया। इसके अलावा, उन्होंने ‘शुद्ध देसी रोमांस’ और ‘दावत-ए-इश्क’ जैसी फिल्मों में भी सहायक निर्देशक के रूप में योगदान दिया। अभिनय का अवसर उन्हें 2019 में फिल्म ‘ये साली आशिकी’ से मिला, जिसमें उन्होंने शिवालिका ओबेरॉय के साथ मुख्य भूमिका निभाई। यह फिल्म रोमांटिक थ्रिलर थी।
हालांकि, ‘ये साली आशिकी’ को समीक्षकों और दर्शकों ने सराहा, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई। इस असफलता का असर वर्धन पुरी के करियर पर भी पड़ा। पिछले 13 सालों से, वर्धन इस इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने और अपने दादा की तरह स्टारडम हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। उनका संघर्ष इस बात का प्रमाण है कि बॉलीवुड में सफलता पाना कितना कठिन है, भले ही आपके परिवार का सिनेमा से गहरा नाता रहा हो। वर्धन पुरी की यात्रा अभी जारी है और यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वह अपने दादा की तरह ही दर्शकों के दिलों में खास जगह बना पाते हैं।
