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मोक्षदा एकादशी: कथा पाठ से पाएं पितरों को नरक से मुक्ति

By Dec 1, 2025

वैदिक पंचांग के अनुसार, आज 01 दिसंबर को मोक्षदा एकादशी का पावन पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की आराधना करने से भक्तों को उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मोक्षदा एकादशी के दिन व्रत रखने और उसकी कथा का पाठ करने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर होते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

सनातन धर्म शास्त्रों में मोक्षदा एकादशी को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को विधि-विधान से करने पर व्यक्ति को समस्त पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि एवं शांति का वास होता है। कहा जाता है कि इस दिन एकादशी व्रत कथा का श्रवण करने वाले साधक को शुभ फलों की प्राप्ति होती है और भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं।

पौराणिक कथा के अनुसार, चंपकनगर नामक एक राज्य में वैखानस नाम का एक राजा शासन करता था। उस राज्य में चारों वेदों के ज्ञाता निष्ठावान ब्राह्मण निवास करते थे। एक रात्रि राजा वैखानस को एक अत्यंत भयानक स्वप्न आया। उसने देखा कि उसके पितृगण नरक में कष्ट भोग रहे हैं और मुक्ति की गुहार लगा रहे हैं। इस स्वप्न से राजा अत्यंत व्यथित और दुखी हो गया।

अपने स्वप्न की व्यथा लेकर राजा ने राज्य के विद्वान ब्राह्मणों से परामर्श किया। उसने बताया कि उसके पूर्वज नरक में पड़े हैं और सहायता मांग रहे हैं, जिससे वह अत्यंत बेचैन है। उसने ब्राह्मणों से पूछा कि ऐसे में उसे क्या करना चाहिए। ब्राह्मणों ने राजा को बताया कि निकट ही पर्वत ऋषि का आश्रम है, जो भविष्य और वर्तमान के ज्ञाता हैं। आपकी समस्या का समाधान ऋषि अवश्य करेंगे।

ब्राह्मणों की सलाह पर राजा वैखानस ऋषि मुनि के आश्रम में पहुंचे और उन्हें अपने स्वप्न के बारे में विस्तार से बताया। राजा ने कहा कि मेरे पूर्वज नरक में कष्ट भोग रहे हैं और मैं उन्हें वहां से निकालने में स्वयं को असहाय महसूस कर रहा हूं। कृपया मार्ग प्रशस्त करें। ऋषि ने राजा को मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का व्रत करने की सलाह दी। ऋषि ने बताया कि इस एकादशी का व्रत विधिपूर्वक करने से आपके पितर नरक की यातनाओं से मुक्त हो जाएंगे और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होगी।

ऋषि के कथनानुसार, राजा वैखानस ने विधि-विधान से मोक्षदा एकादशी का व्रत किया। इस व्रत के शुभ प्रभाव से राजा के पितृगण समस्त पाप कर्मों से मुक्त हो गए और उन्हें स्वर्ग लोक की प्राप्ति हुई। इस प्रकार, मोक्षदा एकादशी का व्रत और कथा का पाठ करने से न केवल व्यक्ति अपने पापों से मुक्ति पाता है, बल्कि अपने पितरों को भी मोक्ष दिला सकता है।

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