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मोक्षदा एकादशी 2025: तुलसी पूजा के नियम और महत्व जानें

By Nov 28, 2025

हिंदू पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोक्षदा एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष यह पावन तिथि 1 दिसंबर को पड़ रही है। यह एकादशी न केवल मोक्ष प्राप्ति के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है, बल्कि इसी दिन श्रीमद्भागवत गीता के जन्म का भी प्रतीक है, जिसे गीता जयंती के नाम से जाना जाता है। इस विशेष अवसर पर, भक्त भगवान विष्णु की आराधना करते हैं और कुछ विशेष नियमों का पालन करते हैं, खासकर तुलसी पूजा को लेकर।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन माता तुलसी भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इसी कारणवश, एकादशी के दिन तुलसी के पौधे में जल अर्पित करना या उसके पत्ते तोड़ना अक्सर वर्जित माना जाता है। हालांकि, जो भक्त इस दिन तुलसी की पूजा करना चाहते हैं, वे कुछ नियमों का पालन करके ऐसा कर सकते हैं।

मोक्षदा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद, अपने पूजा स्थल की साफ-सफाई करें और विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करें। भगवान विष्णु को भोग लगाते समय तुलसी दल अवश्य शामिल करें, भले ही आप सीधे तुलसी के पत्ते न तोड़ें। शाम के समय, तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाएं और 7 बार परिक्रमा करें। इस दौरान, तुलसी माता के मंत्रों का जाप करना अत्यंत शुभ फलदायक माना जाता है।

तुलसी पूजा के लिए कुछ प्रमुख मंत्र इस प्रकार हैं:

महाप्रसाद जननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी, आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोस्तुते।।

तुलसी गायत्री मंत्र: ॐ तुलसीदेव्यै च विद्महे, विष्णुप्रियायै च धीमहि, तन्नो वृन्दा प्रचोदयात् ।।

तुलसी नामाष्टक मंत्र: वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी। पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।। एतभामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम। य: पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलमेता।।

इन मंत्रों का जाप करने से भक्तों को विशेष कृपा प्राप्त होती है और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मोक्षदा एकादशी का व्रत रखने और तुलसी की इस प्रकार पूजा करने से व्यक्ति को मृत्यु के उपरांत मोक्ष की प्राप्ति होती है और सभी पापों से मुक्ति मिलती है।

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