मोहिउद्दीननगर विधानसभा: 10 प्रत्याशियों की जमानत जब्त, भाजपा के राजेश सिंह ने दोबारा मारी बाजी
समस्तीपुर जिले के मोहिउद्दीननगर विधानसभा क्षेत्र में हालिया चुनाव परिणाम कई मायनों में अप्रत्याशित रहे। भारतीय जनता पार्टी के राजेश कुमार सिंह ने दूसरी बार विधानसभा में अपनी जगह पक्की करते हुए जीत दर्ज की। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी राष्ट्रीय जनता दल की एज्या यादव को शिकस्त दी। हालांकि, इस चुनाव की सबसे बड़ी खबर 10 प्रत्याशियों की जमानत जब्त होना रही, जिन्होंने कुल वैध मतों का छठा हिस्सा भी हासिल नहीं किया।
इस चुनाव में कुल 12 प्रत्याशियों ने अपनी किस्मत आजमाई थी, जिनमें से विजेता और उपविजेता को छोड़कर कोई भी अपनी जमानत बचाने में कामयाब नहीं रहा। चौंकाने वाली बात यह रही कि 8 उम्मीदवारों को हजार का आंकड़ा भी छूने में सफलता नहीं मिली, और वे नोटा (NOTA) को मिले 2197 मतों से भी पीछे रह गए। यह मतदाताओं के बदलते मिजाज और स्थापित के बजाय नए विकल्पों को आजमाने की इच्छा को दर्शाता है।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, भाजपा प्रत्याशी राजेश कुमार सिंह को 89,208 मत प्राप्त हुए, जबकि राजद की एज्या यादव को 77,526 मत मिले। जन सुराज पार्टी से चुनाव लड़ रहे राज कपूर सिंह ने 4,414 वोट हासिल किए। निर्दलीय प्रत्याशियों में विश्वनाथ साह को 2,230 और सुनील कुमार राय को 2,025 मत मिले। बहुजन समाज पार्टी के अमरेंद्र कुमार यादव को 1,244 मतों से संतोष करना पड़ा। इनके अतिरिक्त, शेष निर्दलीय और दलीय प्रत्याशी एक हजार मतों का आंकड़ा भी पार नहीं कर सके।
चुनाव परिणाम का विश्लेषण करें तो, जनशक्ति जनता दल से चुनाव लड़ रहे पूर्व विधायक अजय कुमार बुल्गानिन जैसे अनुभवी नेता भी डेढ़ हजार का आंकड़ा पार नहीं कर पाए, जो कई राजनीतिक पंडितों के लिए आश्चर्य का विषय रहा। मतगणना के दौरान शुरुआत में राजद प्रत्याशी एज्या यादव लगातार बढ़त बनाए हुई थीं, जिससे उनके खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई थी। हालांकि, मोहनपुर प्रखंड क्षेत्र की गिनती पूरी होने के बाद राजेश सिंह ने निर्णायक बढ़त बना ली और अंत तक इसे कायम रखते हुए अपने प्रतिद्वंद्वी को बड़े अंतर से हराया।
इस प्रकार, राजेश कुमार सिंह मोहिउद्दीननगर विधानसभा क्षेत्र से दूसरी बार विधायक चुने गए। यह चुनाव परिणाम दर्शाता है कि भले ही मतदाताओं का वोट प्रतिशत बढ़ा हो, लेकिन बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को मतदाताओं का समर्थन नहीं मिल पाया। यह स्थिति राजनीतिक दलों और निर्दलीय प्रत्याशियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है, जो उन्हें जनता की नब्ज समझने और अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर करेगी।
