मोहाली साइबर धोखाधड़ी: बैंक मैनेजर को हाईकोर्ट से मिली एक करोड़ की जमानत
चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में केनरा बैंक के एक रिलेशनशिप मैनेजर को हाई-प्रोफाइल साइबर धोखाधड़ी मामले में नियमित जमानत दे दी है। इस मामले में मोहाली की एक महिला से डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर 1.03 करोड़ रुपये की ठगी हुई थी। याचिकाकर्ता पर आरोप था कि उसने जिस बैंक खाते को खोलने में मदद की, उसका इस्तेमाल इस धोखाधड़ी के माध्यम से प्राप्त धन को स्थानांतरित करने के लिए किया गया था।nnन्यायमूर्ति विनोद एस भारद्वाज की एकल पीठ ने याचिकाकर्ता को राहत देते हुए कहा कि अब तक की जांच के दौरान ऐसी कोई आवश्यकता नहीं पाई गई है कि आरोपी को आगे हिरासत में रखा जाए। अदालत ने याचिकाकर्ता के किसी भी आपराधिक पूर्ववृत्त के न होने, मामले में उसकी भूमिका की सीमा, वसूली की स्थिति और अन्य प्रासंगिक तथ्यों पर विचार करते हुए जमानत मंजूर की। यह मामला एसएएस नगर (मोहाली) साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज एक प्राथमिकी से संबंधित था।nnप्राथमिकी के अनुसार, पीड़ित महिला चरणजीत कौर से व्हाट्सएप पर संपर्क किया गया था। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को मुंबई के कोलाबा पुलिस स्टेशन का अधिकारी बताया और दावा किया कि उसके आधार कार्ड का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों और फर्जी खातों के लिए किया गया है, जिससे उस पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। उसे चेतावनी दी गई कि यदि वह उपस्थित नहीं हुई तो उसे ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ का सामना करना पड़ेगा। 11 से 14 अप्रैल 2025 के बीच चली एक वीडियो कॉल के दौरान, पीड़िता को वर्दीधारी अधिकारियों और पुलिस स्टेशन जैसी पृष्ठभूमि दिखाई गई, और उसे कॉल तोड़ने से मना किया गया।nnसत्यापन की आड़ में, धोखेबाजों ने महिला को भारी रकम तीन किस्तों में स्थानांतरित करने के लिए मजबूर किया: 57 लाख, 29 लाख और 17 लाख रुपये। 18 अप्रैल को जब पीड़िता स्थानीय पुलिस स्टेशन में एनओसी लेने पहुंची, तब उसे इस पूरी ठगी का अहसास हुआ और उसने तुरंत शिकायत दर्ज कराई।nnयाचिकाकर्ता के वकील ने अदालत में दलील दी कि उनका मुवक्किल केवल एक रिलेशनशिप मैनेजर के तौर पर काम कर रहा था और प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर खाता खोलने में सहायता की थी। उन्होंने तर्क दिया कि केवायसी (Know Your Customer) सत्यापन की जिम्मेदारी पूरी तरह से उनकी नहीं थी और न ही उनका धोखाधड़ी में कोई सीधा हाथ था।nnदूसरी ओर, राज्य सरकार की ओर से यह आरोप लगाया गया कि याचिकाकर्ता ने एक काल्पनिक व्यक्ति, मोहम्मद पाशा, के नाम पर बिना उचित जांच-पड़ताल के खाता खोलने में सहायता की। हालांकि, अदालत के समक्ष राज्य यह साबित करने में विफल रहा कि केवायसी सत्यापन की अंतिम जिम्मेदारी वास्तव में रिलेशनशिप मैनेजर की ही होती है।”
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