मणिकर्णिका घाट बनेगा नया धार्मिक पर्यटन स्थल, श्रीकाशी विश्वनाथ धाम की तर्ज पर होगा विकास
वाराणसी का मणिकर्णिका घाट, जो सदियों से मोक्ष का सर्वोच्च तीर्थ माना जाता है, अब श्रीकाशी विश्वनाथ धाम की तर्ज पर एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगा। इस पुनर्विकास परियोजना का उद्देश्य इस प्राचीन स्थल को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाना है। यह परियोजना पूरी होने के बाद काशी में विश्वनाथ धाम के बाद यह दूसरा सबसे बड़ा धार्मिक पर्यटन केंद्र होगा।
काशी को ‘मोक्ष नगरी’ कहा जाता है और मणिकर्णिका घाट को इसका सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। मान्यता है कि यहां चिता की अग्नि कभी शांत नहीं होती। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने यहां चक्र पुष्करिणी नामक कुंड का निर्माण किया था, और भगवान शिव के आगमन पर उनके कान का मणिजड़ित कुंडल गिरने से इस स्थान का नाम मणिकर्णिका पड़ा। शास्त्रों के अनुसार, स्वयं महादेव यहां जीवात्मा को राम-तारक मंत्र देकर जन्म-मरण के बंधन से मुक्त करते हैं।
पुनर्विकास योजना में पर्यटकों के लिए एक अलग विजिटर पाथवे और शवयात्रियों के लिए एक अलग मार्ग प्रस्तावित किया गया है। घाट पर प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए चिमनी युक्त 32 अत्याधुनिक क्रेमाटोरियम बनाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, पंजीकरण कक्ष, लकड़ी भंडारण क्षेत्र, सामुदायिक प्रतीक्षालय, दो सामुदायिक शौचालय और हरित क्षेत्र भी विकसित किए जाएंगे। यह कार्य बंगाल की रूपा फाउंडेशन द्वारा सीएसआर फंड से 18 करोड़ रुपये की लागत से कराया जा रहा है, जिसमें पौराणिक धरोहरों को उनके ऐतिहासिक महत्व के अनुरूप संरक्षित किया जाएगा।
इस पुनर्विकास से घाट न केवल स्वच्छ और सुंदर बनेगा, बल्कि शवदाह के दौरान होने वाले प्रदूषण से भी लोगों को मुक्ति मिलेगी। एलिवेटेड प्लेटफार्म और शवदाह के लिए आने वालों को घाट पर बैठने जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी, जिससे यह स्थान धार्मिक पर्यटन के लिए एक महत्वपूर्ण आकर्षण बनेगा।
