मनरेगा स्टेडियम पर किसानों का कब्जा, खेल मैदान बना कृषि भूमि
राज्य सरकार द्वारा खेल को बढ़ावा देने के लिए मनरेगा के तहत पंचायतों में स्टेडियम निर्माण की महत्वाकांक्षी योजना चलाई जा रही है, लेकिन डोभी की नीमा पंचायत में यह योजना धूल फांक रही है। सूरजमंडल उच्च विद्यालय के मैदान में क्रिकेट, फुटबॉल, वॉलीबॉल, कबड्डी और बास्केटबॉल जैसी विभिन्न खेलों के लिए पिच का निर्माण कराया गया था, जिसका उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करना था।
जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। निर्माण के तुरंत बाद से ही खेल मैदान पर स्थानीय किसानों का कब्जा हो गया है। मैदान की चहारदीवारी न होने के कारण, इसका उपयोग कृषि कार्यों के लिए खुलेआम किया जा रहा है। किसान यहां मशीनों के माध्यम से धान की पिटाई कर रहे हैं और नेवारी से धान अलग करने जैसे कार्य कर रहे हैं। इस अवैज्ञानिक उपयोग से स्टेडियम की पक्की पिच और पूरा मैदान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो रहा है, जिससे यह धीरे-धीरे एक खेल परिसर के बजाय कृषि भूमि में तब्दील हो गया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, स्टेडियम निर्माण के शुरुआती दौर से ही चहारदीवारी की मांग उठाई जाती रही है, ताकि मैदान को सुरक्षित रखा जा सके और इसका मूल उद्देश्य पूरा हो सके। हालांकि, विभागीय उदासीनता के चलते आज तक चहारदीवारी का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। इसका सीधा खामियाजा विद्यालय के बच्चों और स्थानीय खिलाड़ियों को भुगतना पड़ रहा है, जो इन सुविधाओं से पूरी तरह वंचित हैं।
पंचायत समिति सदस्य पंकज कुमार ने इस गंभीर मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि उन्होंने प्रशासन से शीघ्र चहारदीवारी के निर्माण की मांग की है। उनका कहना है कि चहारदीवारी बनने से ही यह स्टेडियम अपने मूल उद्देश्य, यानी ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन, की पूर्ति कर सकेगा। यह घटना सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और देखरेख की कमी को उजागर करती है, जिससे विकास की उम्मीदें धुंधली पड़ जाती हैं।
